देवघर। अभाविप झारखंड प्रांत के प्रांत सह मंत्री शुभम राय ने कहा कि “पढ़ने वाले छात्रों को संत फ्रांसिस प्रबंधन द्वारा समाज सेवा के नाम पर चंदा वसूली करवाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है छात्रों के ऊपर मानसिक दवाब बनाकर पैसा उगाही कराया जाता है एक और जहां पूरा देश शक्ति को आराधना,पूजा पाठ में व्यस्त है; छात्र, छोटे-छोटे बच्चे पूजा आराधना के साथ-साथ छुट्टी का आनंद उठाते है वहीं इसके विमुख विद्यालय प्रबंधन द्वारा समाज सेवा के नाम पर 50-60 की संख्या में रसीद देकर जहां एक रसीद का शुल्क 20 होता है उगाही के लिए नाबालिक छात्रों को लगाया जाता है बच्चे विद्यालय पढ़ने जाते हैं, लेकिन प्रबंधन द्वारा चंदा वसूली के कार्य में छात्रों को अभी से ही लगाया जा रहा है जो अत्यंत ही शर्मनाक है। उल्लेखनीय है कि जो बच्चे रसीद काट कर पैसे नहीं उठा पाएंगे वह दूसरे तरीके को अपनाएंगे, जिससे बाल मन व्यभिचार की ओर प्रेरित होंगे। विद्यालय के दबावों में हो सकता है बच्चे अपने मां-पिता के बटुआ से चोरी भी करे। ऐसे में प्रश्न उठता है विद्यालय यह कैसी नैतिक शिक्षा दे रही है ? विद्यालय का काम बच्चों में नैतिक शिक्षा देकर राष्ट्र और समाज के लिए तैयार करना होता है न कि वसूली गैंग बनाना। जहां तक सेवा की बात है तो भारतीयों के मूल तत्व में ही सेवा भावना अंतर्निहित है। सिर्फ पैसों के माध्यम से ही सेवा नहीं होता है विभिन्न माध्यमों से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता जैसे कार्य ,गौ माता की सेवा, तुलसी पुजन जैसे गतिविधियों के साथ सेवा कार्य किया जा सकता है। बच्चों के हाथों में चंदा का रसीद थमाना छात्रों द्वारा अभिभावकों के जेब काटने के समान है पूर्व के घटनाक्रमों से यदि इस विषय को जोड़ा जाए तो मालूम होता है कि यह राशि धर्मांतरण के उपयोग में भी लाया जा सकता है संत फ्रांसिस विद्यालय जसीडीह की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है जिला प्रशासन से आग्रह है जल्द से जल्द ऐसे विषयों को संज्ञान में लेते हुए उचित कार्रवाई की जाए।
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