कर्जदारों को तत्काल फायदा या नुकसान नहीं होगा
नई दिल्ली । देश के दो प्रमुख बैंकों एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) में बदलाव किया है. एचडीएफसी बैंक ने एमसीएलआर में 5 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपनी 3 महीने की एमसीएलआर में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. ये नई दरें अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह से प्रभावी हुई हैं, पर इसका हर कर्जदार पर तत्काल असर नहीं होगा! एचडीएफसी बैंक की नई दरें 7 अगस्त से लागू हैं, जिसके बाद अलग-अलग अवधि के लिए एमसीएलआर अब 8 फीसदी से 8.65 फीसदी के बीच है. बैंक ने अपनी ज्यादातर एमसीएलआर में 0.05 प्रतिशत की कमी की है. हालांकि, इसका फायदा उन्हीं ग्राहकों को मिलेगा जिनका लोन एमसीएलआर से जुड़ा है और जिनकी ब्याज दर की अगली रीसेट डेट अभी बाकी है. लोन की अंतिम ब्याज दर एमसीएलआर और बैंक के स्प्रेड को मिलाकर तय होती है। इसके विपरीत बैंक ऑफ बड़ौदा ने 3 महीने की एमसीएलआर को 10 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.30 फीसदी कर दिया है, जो 12 अगस्त से प्रभावी है. इससे एमसीएलआर से जुड़े कुछ ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अक्टूबर 2019 के बाद दिए गए अधिकांश फ्लोटिंग रेट रिटेल लोन बाहरी बेंचमार्क, जैसे रेपो रेट, से जुड़े होते हैं, न कि एमसीएलआर से ऐसे ग्राहकों पर इन एमसीएलआर बदलावों का सीधा असर नहीं होता और उन्हें अपनी ब्याज दर के लिए रेपो रेट के बदलावों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उनकी दरें आमतौर पर हर तीन महीने में रीसेट होती हैं।


