नई दिल्ली । जब किसी को डायबिटीज हो जाती है, तो सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि चाय की आदत कैसे छोड़ी जाए। डायबिटिज के मरीज चाय छोड़ने के बजाय उसमें इस्तेमाल होने वाली चीनी का विकल्प तलाशते हैं। आमतौर पर गुड़, देसी खांड और शहद को नेचुरल और हेल्दी मानकर अपनाया जाता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये विकल्प वाकई डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षित हैं। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी स्वीटनर के असर को समझने का सबसे सही तरीका है ग्लूकोज मीटर से ब्लड शुगर में आने वाले बदलाव को मापना। इसी आधार पर यह जानने की कोशिश की गई कि चाय में गुड़, देसी खांड या शहद मिलाने पर शुगर स्पाइक कितना होता है और इनमें से कौन सा विकल्प तुलनात्मक रूप से बेहतर साबित होता है। तुलना की शुरुआत बिना चीनी वाली चाय और सफेद चीनी वाली चाय से की गई। विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना चीनी की चाय पीने पर ब्लड शुगर में केवल 3 एमजी/डीएल का मामूली इजाफा हुआ, जो लगभग नगण्य माना जा सकता है।
वहीं, जब चाय में सफेद चीनी मिलाई गई, तो शुगर लेवल एमजी/डीएल तक बढ़ गया, जो सिर्फ एक कप चाय के लिहाज से काफी ज्यादा है। इसके बाद सफेद चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया गया। गुड़ वाली चाय पीने पर ब्लड शुगर में 16 एमजी/डीएल की बढ़ोतरी देखी गई। यह आंकड़ा सफेद चीनी से कम जरूर है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं कहा जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि गुड़ अनरिफाइंड होता है और इसमें कुछ विटामिन व मिनरल्स पाए जाते हैं, इसी वजह से इसका असर चीनी की तुलना में थोड़ा कम होता है। इसके बाद देसी खांड की जांच की गई। एक चम्मच देसी खांड डालकर पी गई चाय से शुगर स्पाइक 13 एमजी/डीएल तक पहुंचा, जो गुड़ से भी कम निकला। वहीं, जब चाय में दो चम्मच शहद मिलाया गया, तो ब्लड शुगर में 18 एमजी/डीएल का उछाल दर्ज किया गया, जो सफेद चीनी से थोड़ा कम लेकिन गुड़ और देसी खांड से ज्यादा रहा।
इन आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि गुड़, देसी खांड और शहद तीनों ही रिफाइंड चीनी से कुछ हद तक बेहतर विकल्प हैं, लेकिन ये भी ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। न्यूट्रिशन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति दिन में सिर्फ एक कप चाय पीता है, तो उसके लिए गुड़ या देसी खांड तुलनात्मक रूप से बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों का शुगर लेवल पहले से ज्यादा रहता है, उनके लिए बिना चीनी वाली चाय सबसे सुरक्षित मानी जाती है। वहीं, जो लोग दिन में कई कप चाय पीने के आदी हैं, उन्हें समझना चाहिए कि चाहे स्वीटनर कोई भी हो, ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव आता ही रहेगा।
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