नई दिल्ली । बार-बार स्टीम लेना नाक और त्वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। भले ही स्टीम से बलगम पतला होता है और नाक खुल जाती है, लेकिन लगातार गर्म भाप का असर शरीर के नाजुक हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकता है। अध्ययनों के बाद यह दावा किया है हैल्थ विशेषज्ञों ने। ताजा रिसर्च में बताया गया है कि बार-बार स्टीम लेने से नाक की अंदरूनी त्वचा और म्यूकस मेम्ब्रेन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इस अध्ययन में 400 लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें से 60 प्रतिशत लोग हफ्ते में तीन बार से ज्यादा स्टीम लेते थे। इन लोगों में से लगभग 35 प्रतिशत ने नाक में जलन, सूखापन और स्किन डैमेज की शिकायत की। रिसर्च में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में बार-बार गर्म भाप लेने से नाक के अंदर की झिल्ली जल गई थी, जिससे खून निकलने जैसी दिक्कतें सामने आईं। ईएनटी विशेषज्ञों का कहना है कि स्टीम लेना तब फायदेमंद है जब नाक पूरी तरह बंद हो और सांस लेने में दिक्कत हो, लेकिन जरूरत से ज्यादा स्टीम लेना उलटा नुकसान पहुंचा सकता है। गर्म पानी की भाप नाक की पतली त्वचा को जला सकती है, जिससे लालिमा और इंफ्लेमेशन हो सकता है। इसके अलावा, अगर पानी बहुत ज्यादा गर्म है या चेहरा बहुत पास रखा जाता है तो यह त्वचा के लिए और भी खतरनाक बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर हल्की बंद नाक या सर्दी में स्टीम लेना जरूरी नहीं होता। एक अध्ययन में भी यही पाया गया कि जो लोग हफ्ते में पांच बार से ज्यादा स्टीम लेते हैं, उन्हें नाक में सूखापन, संक्रमण और क्रॉनिक साइनसाइटिस की समस्या अधिक होती है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार स्टीम लेने से नाक की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है, जिससे उसकी सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है और बैक्टीरिया व वायरस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि उनकी त्वचा और झिल्ली अधिक संवेदनशील होती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि स्टीम केवल तब लें जब नाक बुरी तरह बंद हो या सांस लेने में तकलीफ हो रही हो। हल्की जकड़न या ठंड में सलाइन वॉटर ड्रॉप्स या नमक-पानी से गरारा करना बेहतर विकल्प है।
अगर स्टीम लेना जरूरी लगे तो पानी को उबालने के बाद कम से कम पांच मिनट ठंडा होने दें, चेहरा लगभग 12 से 15 इंच की दूरी पर रखें और पांच से सात मिनट से ज्यादा स्टीम न लें। स्टीम के बाद नाक को हल्के गीले कपड़े से पोंछें और मॉइस्चराइजर का उपयोग करें ताकि सूखापन और जलन न हो। कुल मिलाकर, स्टीम राहत जरूर देती है लेकिन इसे सही तरीके से और सीमित मात्रा में लेना जरूरी है। जरूरत से ज्यादा या गलत तरीके से स्टीम लेने से फायदा नहीं बल्कि नुकसान हो सकता है। इसलिए, डॉक्टरों की सलाह मानकर ही इस घरेलू उपाय का इस्तेमाल करें ताकि यह राहत का तरीका किसी नई परेशानी में न बदल जाए। मालूम हो कि सर्दी-जुकाम या नाक बंद होने की स्थिति में ज्यादातर लोग स्टीम यानी भाप लेने का सहारा लेते हैं। यह एक पारंपरिक घरेलू उपाय है, जो तुरंत राहत देता है और सांस लेने में आसानी करता है।
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