नई दिल्ली । बार-बार होने वाला दर्द किसी स्वास्थ्य समस्या या जीवनशैली से जुड़े कारण का संकेत भी हो सकता है। इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में हर बार बिना कारण समझे दर्द निवारक दवा लेना उचित नहीं माना जाता। लगातार या बार-बार सिरदर्द होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी सिरदर्द का एक कारण हो सकता है। खासतौर पर मासिक धर्म के आसपास होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव से कुछ महिलाओं में माइग्रेन या सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है। उम्र बढ़ने के साथ होने वाले हार्मोनल बदलावों के दौरान भी सिरदर्द के पैटर्न में परिवर्तन देखा जा सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। शरीर में पानी की कमी सिरदर्द का एक आम कारण है। पर्याप्त पानी नहीं पीने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है, जिसके साथ सिर में दर्द, कमजोरी और चक्कर जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। गर्मी, अधिक पसीना आने या पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लेने की स्थिति में यह समस्या ज्यादा बढ़ सकती है। इसके अलावा नींद की कमी भी सिरदर्द को बढ़ा सकती है। रोजाना पर्याप्त और नियमित नींद लेना शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। लंबे समय तक खाना न खाने या भोजन के बीच बहुत ज्यादा अंतर होने से भी कुछ लोगों को सिरदर्द हो सकता है। विशेष रूप से व्यस्त दिनचर्या में नाश्ता या भोजन छोड़ने की आदत परेशानी बढ़ा सकती है। मधुमेह की दवा लेने वाले लोगों में रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम होने पर सिरदर्द के साथ पसीना, कमजोरी, कंपकंपी और चक्कर जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
इसके अलावा लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए गलत मुद्रा में बैठना भी सिरदर्द का कारण बन सकता है। गर्दन, कंधों और जबड़े की मांसपेशियों में तनाव के कारण सिर के आसपास दबाव या दर्द महसूस हो सकता है। इसे अक्सर तनाव संबंधी सिरदर्द कहा जाता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर पड़ने वाला तनाव भी कुछ लोगों में सिरदर्द बढ़ा सकता है। यदि सिरदर्द अचानक बहुत तेज हो, बार-बार बढ़ रहा हो या इसके साथ बेहोशी, बोलने में परेशानी, कमजोरी, दृष्टि में बदलाव, तेज बुखार या गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।


