नई दिल्ली । डायबिटीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो दवाएं दिमागी सेहत को बेहतर करने में मददगार साबित हो सकती हैं। यह दावा किया है अमेरिका की वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की एक रिसर्च में। विशेषज्ञों का कहना है कि ये दवाएं डिमेंशिया और अल्जाइमर्स जैसी गंभीर बीमारियों के असर को कम करने की क्षमता रखती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज अल्जाइमर्स के उपचार में एक बड़ी उम्मीद की तरह है। रिसर्च टीम ने इन दवाओं के प्रभाव को समझने के लिए 55 से 85 साल की उम्र के 47 लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल किया। इनमें से कुछ लोगों को डायबिटीज की दवा एम्पाग्लिफ्लोजिन दी गई, जबकि अन्य को इंसुलिन नेजल स्प्रे का इस्तेमाल कराया गया। नतीजों में पाया गया कि दोनों दवाओं का असर अल्जाइमर्स से पीड़ित मरीजों पर सकारात्मक रहा। एम्पाग्लिफ्लोजिन के प्रयोग से कई प्रतिभागियों के ब्रेन इंजरी मार्कर्स कम हो गए और दिमाग में रक्त प्रवाह (ब्लड फ्लो) में सुधार देखा गया।
वहीं, इंसुलिन नेजल स्प्रे लेने वाले मरीजों में न्यूरोवैस्कुलर हेल्थ और इम्यून फंक्शन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ। अध्ययन में यह भी सामने आया कि एम्पाग्लिफ्लोजिन सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड में मौजूद टाउ प्रोटीन लेवल को कम करने में मदद करती है। टाउ प्रोटीन अल्जाइमर्स की प्रमुख वजहों में से एक मानी जाती है। इसके अलावा, इंसुलिन स्प्रे लेने वाले लोगों में मेमोरी स्कोर बेहतर हुए और उनके दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा। हालांकि, यह रिसर्च फिलहाल सीमित पैमाने पर की गई है और इसमें प्रतिभागियों की संख्या कम थी।
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