एम्स की टीम ने सिखाया जीवन रक्षक सीपीआर पुलिस कर्मियों ने किया व्यावहारिक अभ्यास
देवघर। पुलिस केन्द्र स्थित मीटिंग हॉल में गुरुवार को एक अलग ही तरह की गतिविधि देखने को मिली, जहां अपराध और कानून व्यवस्था के बीच अब जीवन बचाने की तैयारी भी सिखाई गई। प्रातः 10 बजे से शुरू हुए इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस कर्मियों को आपात स्थिति में जीवन रक्षक तकनीक सीपीआर की बारीकियां समझाई गईं। एम्स, देवघर के वरीय चिकित्सकों की टीम ने करीब डेढ़ घंटे तक चले इस सत्र में पुलिस कर्मियों को कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थिति में तत्काल सहायता देने की विधि सिखाई। प्रशिक्षण के दौरान डमी मॉडल पर पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया, ताकि हर कर्मी इसे व्यवहार में भी उतार सके। कार्यक्रम में विभिन्न थानों से आए एक-एक सहायक उपनिरीक्षक और आरक्षी के साथ बाबा मंदिर थाना के अधिकांश पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि हृदय गति रुकने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं, जिन्हें गोल्डन ऑवर कहा जाता है। इस दौरान सही तरीके से सीपीआर
देने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। पुलिस कर्मियों ने भी पूरे उत्साह के साथ इस तकनीक को सीखा और अभ्यास किया। एसपी सौरभ ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी घटना स्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली टीम अक्सर पुलिस ही होती है। ऐसे में यदि पुलिस कर्मी सीपीआर जैसी तकनीकों में दक्ष हों, तो वे समय रहते किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने एम्स की टीम का आभार जताते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रहेंगे। इस मौके पर एम्स की ओर से प्रोजेक्ट हेड डॉ राखी गौड़, प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर डॉ अंजलि सॉ, प्रोफेसर डॉ नितिन और नर्सिंग ऑफिसर मिस एकता ने प्रशिक्षण में अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कानून के साथ-साथ जीवन रक्षा भी पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होती जा रही है।


