खूंटी । आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय सहित सभी कल्याण विभाग के विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति अब आउटसोर्स के माध्यम से नहीं होगी। ये बातें राज्य के आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहीं। मंत्री से मुलाकात के बाद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन, झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को यह जानकारी दी। संस्था के झारखंड प्रदेश महासचिव तपन कुमार घोष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि विभागीय विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि जिन गांवों और मौजों में विद्यालय संचालित हैं, वहां के इच्छुक एवं योग्य अभ्यर्थियों तथा विद्यालय के लिए भूमि दान देने वाले परिवारों को नियुक्ति में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने विभागीय सचिव को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों को आदेश जारी किया जाए कि आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्स के माध्यम से नहीं की जाएगी। इसके बजाय संबंधित विद्यालय क्षेत्र के स्थानीय लोगों को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के झारखंड प्रदेश महासचिव तपन कुमार घोष, सचिव शंकर शंभु राजेश, कार्यालय सचिव गणेश लोहरा, अनुप कुमार वर्मा, बिरसा लोहरा एवं तुलसी प्रजापति सहित अन्य सदस्य शामिल थे।


