रैयती जमीन का दावा नहीं हुआ स्वीकार ,अतिक्रमण हटाने पर लगी मुहर
संताल एक्सप्रेस प्रतिनिधि
पाकुड़ । पाकुड़ मुख्यालय स्थित आंबेडकर चौक के समीप तालाब की भूमि पर बने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हटाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट से भी याचिकाकर्ताओं को राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने तालाब की जमीन पर बने मकानों एवं दुकानों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।जानकारी के अनुसार, पाकुड़ अंचल कार्यालय ने मौजा पाकुड़, खाता संख्या-588 एवं दाग संख्या-1345 स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हटाने के लिए नोटिस जारी किया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए भूमि के रैयत धर्मेंद्र सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि जिस भूमि पर भवन एवं दुकानें बनी हैं, वह उनकी रैयती संपत्ति है।मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में पारित आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है और इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।अंचल कार्यालय की ओर से संबंधित दुकानदारों को पहले 21 जुलाई और बाद में 27 जुलाई तक प्रतिष्ठान खाली करने का निर्देश देते हुए नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में उल्लेख किया गया था कि संबंधित भूमि राजस्व अभिलेखों में खतियानी रैयत शेषनाथ पांडेय के नाम तालाब के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जो झारखंड काश्तकारी अधिनियम, 1949 की धारा-35 के प्रावधानों के विपरीत है।प्रशासन ने नोटिस में झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए तालाब की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की आवश्यकता भी बताई थी। अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद संबंधित दुकानदारों ने बुलडोजर कार्रवाई की आशंका को देखते हुए अपने-अपने प्रतिष्ठानों को खाली करना शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से जल्द ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
दुकानदारों की मांग-मिले आगे की कानूनी लड़ाई का मौका
दुकानदारों ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उनके सामने केवल दुकान टूटने का नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य और रोजी-रोटी का सवाल है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए उचित समय दिया जाए, ताकि वे अपने अधिकारों के संबंध में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकें। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। ऐसे में आंबेडकर चौक के समीप स्थित इन प्रतिष्ठानों में कारोबार की जगह अब सामान समेटने की कवायद शुरू हो गई है। वर्षों से यहां अपनी रोजी-रोटी चला रहे दुकानदारों के लिए यह फैसला उनके कारोबार के साथ-साथ उनके भविष्य पर भी गहरा असर डालने वाला साबित हो सकता है।


