नई दिल्ली । दीपावली के पांच दिवसीय पर्व का समापन भाई दूज के त्यौहार के साथ होता है। भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक का पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। वहीं, भाई बहनों को उपहार देकर जीवनभर उनकी रक्षा और साथ निभाने का वचन देता हैं। वर्ष 2026 में द्वितीया तिथि दो दिन पड़ने के कारण त्यौहार की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 10 नवंबर 2026, मंगलवार को दोपहर 2 बजे शुरू होगी और 11 नवंबर, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि और अपराह्न काल को ध्यान में रखकर भाई दूज का पर्व 11 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा।
इस दिन भाई को तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक बताया गया है। बहनें इस अवधि में भाइयों को तिलक लगाकर उनकी खुशहाली और दीर्घायु की कामना कर सकती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाई दूज को यम द्वितीया भी कहते है। इस पर्व का संबंध सूर्यदेव के पुत्र यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। पौराणिक कथा के मुताबिक, कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे। यमुना ने उनका तिलक कर आरती उतारी और भोजन कराया। बहन के प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उस भाई को लंबी उम्र और सुख-समृद्धि प्राप्त होगी।
भाई दूज के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान गणेश, विष्णु तथा यमराज का स्मरण करें। इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, फूल, मिठाई, दीपक और नारियल से पूजा की थाली तैयार करें। शुभ मुहूर्त में भाई को आसन पर बैठाकर माथे पर तिलक लगाएं, आरती उतारें और मिठाई खिलाएं। इसके बाद भाई की लंबी उम्र और तरक्की की कामना करें। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपना स्नेह व्यक्त करें। मान्यता है कि भाई दूज पर बहन के हाथों से भोजन करना भी शुभ होता है। यह त्यौहार धार्मिक आस्था के साथ भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने और आपसी प्रेम जताने का विशेष अवसर है।




