रांची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार नए साल की शुरुआत में अपने मंत्रिमंडल को नए सिरे से गढ़ने की तैयारी में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, खरमास के बाद राज्य में कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है, जिसमें विशेष रूप से स्वास्थ्य और कृषि विभाग के मंत्रियों के बदलने की संभावना जताई जा रही है। हेमंत सोरेन पार्ट-2 की सरकार अब पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। कथित आर्थिक संकट के बावजूद सरकार विकास योजनाओं को तेज रफ्तार देने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में सरकार जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल में आंशिक फेरबदल पर विचार कर रही है। जिन विभागों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा और जिनको लेकर जन-असंतोष की स्थिति बनी हुई है, वहां बदलाव लगभग तय माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को लेकर है। उनकी बयानबाजी से कांग्रेस पार्टी के भीतर भी असंतोष की बात सामने आ रही है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी स्वास्थ्य विभाग के कामकाज से संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। राज्यभर के स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली, मरीजों की शिकायतें और व्यवस्थागत खामियों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर पाकुड़ से विधायक निशित आलम का नाम चर्चा में है। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से सरकार को अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ महिलाओं के बीच भी राजनीतिक मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
दूसरी ओर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के विभागीय प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उनके स्थान पर कांग्रेस के रामचंद्र सिंह, सोनाराम सिंकु, नमन विक्सल कोंगाड़ी और राजेश कच्छप जैसे नेताओं के नाम पर चर्चा चल रही है। इनमें से किसी एक को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। मंत्रिमंडल विस्तार में केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि झामुमो और राजद कोटे में भी फेरबदल की संभावना है। पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद घाटशिला से विधायक बने उनके पुत्र सोमेश सोरेन को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं राजद कोटे से संजय प्रसाद यादव की जगह विधायक दल के नेता सुरेश पासवान को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। राजनीतिक संकेतों के मुताबिक, जनवरी 2026 में हेमंत सोरेन सरकार का मंत्रिमंडल नए स्वरूप में नजर आ सकता है। माना जा रहा है कि यह फेरबदल सरकार के प्रदर्शन को बेहतर करने और जनता के बीच भरोसा मजबूत करने की रणनीति का अहम हिस्सा होगा।


