कोर्ट के अंदर वाद-विवाद का वीडियो वायरस
नई दिल्ली । दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में वरिष्ठ एडीजी रैंक के न्यायिक अधिकारी और जिला बार के एक वकील के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें जज साहब के ऊपर आरोप लगाए गए हैं कि वह अपने केबिन में बैठकर ड्रिंक करते हैं, अदालत का काम नहीं करते हैं। वहीं दूसरी तरफ जज साहब यह कहते हुए दिख रहे हैं की जबरदस्ती दबाव बनाकर गलत काम कोर्ट से कराना चाहते हैं। वह किसी दबाव में नहीं आएंगे।
वायरल वीडियो में जो जज साहब की और वकीलों की भाषा है, उसको सुनने के बाद यही कहा जा रहा है की सब्जी बाजार के कुंजड़े भी लड़ाई में जिस भाषा का उपयोग नहीं करते हैं वह कोर्ट में होती हुई दिख रही है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अदालत कक्ष के भीतर दोनों पक्षों के बीच गहमागहमी और तीखी नोकझोंक साफ दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है, एक मामले में तत्काल आदेश जारी कराने का दबाव वकील साहब बना रहे थे। जिसके कारण यह विवाद शुरू हुआ। इस घटना के बाद रोहिणी कोर्ट परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
वायरल वीडियो में न्यायिक अधिकारी कथित तौर पर यह कहते सुनाई दे रहे हैं। “हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाकर मेरे खिलाफ कार्रवाई करवा दो, वहां तुम्हारे बड़े-बड़े आका बैठे हुए हैं। वहीं, संबंधित वकील न्यायाधीश को गाली बकने के लिए उकसा रहे हैं। घटना के दौरान अदालत में मौजूद अन्य अधिवक्ताओं और कर्मचारियों ने बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन दोनों ही शांत नहीं हुए।
इस घटना ने न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अदालत में हो रहे भ्रष्टाचार के मामलों को भी उजागर किया है। दलाल जैसे शब्दों का उपयोग खुलकर हो रहा है। बार और बेंच के बीच संवाद एवं मर्यादा पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। फिलहाल इस मामले में किसी आधिकारिक कार्रवाई या जांच की पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो को लेकर न्यायिक हलकों में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जिला बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का दबाव जिस तरह से न्यायालयों के ऊपर देखने को मिल रहा है। उसने छात्र संगठनों की याद दिला दी है। बार और न्याय पालिका में एक विचारधारा के लोग पिछले एक दशक में महत्वपूर्ण पदों पर आए हैं। उसके बाद से स्थिति तेजी के साथ बिगड़ती हुई दिख रही है। जिस किसी ने भी इस वीडियो को देखा है, उसके मन में बस एक ही बात आ रही है। इस तरह का झगड़ा और इस तरह के शब्दों का उपयोग गुंडे, मवाली और मूर्ख भी नहीं करते हैं। जिन शब्दों का उपयोग जज साहब और वकील साहबानो के बीच हुआ है।


