नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध एक नए स्वर्णिम दौर में प्रवेश कर चुके हैं। दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्ते वर्तमान समय में अपने सबसे सुदृढ़ स्तर पर हैं। विभिन्न उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान यह रेखांकित किया गया है कि फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी, द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग समेत हर प्रमुख क्षेत्र में दोनों देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहे हैं। दोनों देशों का शीर्ष नेतृत्व लगातार संवाद बनाए हुए है, और उच्चस्तरीय यात्राओं का सिलसिला भी लगातार जारी है। प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के संबंध में बेहद सकारात्मक संकेत मिले हैं। यह व्यापार समझौता काफी समय से अंतिम चरण के करीब बना हुआ है और इसे जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने के प्रयास तेजी से चल रहे हैं। अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों की तुलना करते हुए यह भी कहा गया है कि कई व्यापारिक वार्ताओं में दशकों लग जाते हैं, जबकि भारत और अमेरिका के बीच इस विषय पर केंद्रित वार्ता को अभी अपेक्षाकृत कम समय हुआ है। दोनों देशों की वार्ताकार टीमें आपसी व्यापारिक अड़चनों को दूर कर इस समझौते को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रक्षा और सामरिक साझेदारी के मोर्चे पर भी दोनों देशों का तालमेल और आपसी सहयोग अद्भुत रहा है। भारत अमेरिका के साथ जितने व्यापक और जटिल सैन्य अभ्यास करता है, उतने किसी अन्य भागीदार देश के साथ नहीं किए जाते हैं। हाल ही में संपन्न हुए युद्ध अभ्यास और वायुसेना के तरंग शक्ति जैसे महत्वपूर्ण अभ्यासों में दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं ने अपनी उत्कृष्ट परिचालन क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है। इन सैन्य अभ्यासों में अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और रक्षा उपकरणों ने भी हिस्सा लिया। आने वाले दिनों में और भी संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे दोनों देशों के बलों के बीच आपसी अंतर-संचालनीयता और अधिक मजबूत होगी। क्वाड गठबंधन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यह मंच अमेरिका और उसके सहयोगियों की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच मंत्रिस्तरीय वार्ताएं नियमित रूप से आयोजित हो रही हैं। आगामी वैश्विक शिखर सम्मेलनों से पूर्व दोनों देश कई महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक पहलों को अंतिम रूप देने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। यह घनिष्ठ और बहुआयामी सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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