नई दिल्ली । चिकित्सा विशेषज्ञ बिजी लाइफस्टाइल को आजकल तेजी से बढ़ रही गंभीर बीमारियों का सबसे बड़ा और खतरनाक कारण मानते हैं। काम की आपाधापी के बीच स्वास्थ्य धीरे-धीरे हमारी प्राथमिकताओं की सूची से बाहर होता चला जाता है। विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि आधुनिक जीवनशैली ने हमें इतना व्यस्त कर दिया है कि हम अपने शरीर की मूलभूत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
कभी समय पर खाना न खाना, उसकी जगह रेडी-टू-ईट जंक फूड से पेट भर लेना, तो कभी काम का बोझ खत्म करने के लिए नींद की बलि चढ़ा देना और व्यायाम को अनिश्चित काल के लिए टाल देना ये सब इसी व्यस्त जीवनशैली के दुष्परिणाम हैं। शुरुआत में ये छोटी-छोटी लापरवाहियाँ भले ही मामूली लगें, लेकिन देखते ही देखते ये हमारी जिंदगी का नया सामान्य बन जाती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस व्यस्त दिनचर्या को एक अदृश्य हत्यारा मान रहे हैं, जो बिना किसी शुरुआती लक्षण के शरीर को अंदर से खोखला कर रहा है। उनका कहना है कि दिक्कत समय की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं की है। ज्यादातर लोगों के पास समय की कमी नहीं होती, बल्कि सही और व्यवस्थित आदतों की कमी होती है।
दिन में 10-15 मिनट टहलना, समय पर संतुलित भोजन करना और 7-8 घंटे की गहरी नींद लेना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है, जिसके लिए बहुत अधिक समय या प्रयास की आवश्यकता हो। चूंकि इन छोटी आदतों का फायदा तुरंत दिखाई नहीं देता, इसलिए लोग इन्हें आसानी से टाल देते हैं। वहीं, ऑफिस का काम पूरा करने पर तुरंत परिणाम या सराहना मिलती है, जिससे हम अनजाने में अपनी सेहत से समझौता कर बैठते हैं। हमारा शरीर खराब जीवनशैली पर बहुत धीमी रफ्तार से प्रतिक्रिया देता है। रक्तचाप का धीरे-धीरे बढ़ना, रक्त शर्करा का अनियंत्रित होना और चयापचय (मेटाबॉलिज्म) का सुस्त पड़ना इनके शुरुआती दौर में कोई लक्षण नज़र नहीं आते। जब तक बीमारियाँ सामने आती हैं, तब तक अंदर ही अंदर काफी नुकसान हो चुका होता है।


