सहारनपुर । उत्तर प्रदेश में पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट से जुड़े 17 करोड़ 29 लाख के नकली नोटों के मामले में मंगलवार रात बैंक मैनेजर की गिरफ्तारी से जांच अब अहम खुलासों के करीब पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रबंधक ने कई राज उजागर किए हैं। करीब सात दिनों से मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अब स्थानीय पुलिस द्वारा की गई जांच का पूरा रिकॉर्ड अपने अध्ययन में शामिल करेगी। इसके लिए सहारनपुर पुलिस केस डायरी एनआईए को सौंपने की प्रक्रिया पूरी करने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार, अगले दो दिन में जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने की उम्मीद है।
बैंक के ही करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी तादाद में नकली नोटों का मामला सामने आने से शहर में खलबली मच गई थी। शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आदेश पर सात सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी के साथ क्राइम ब्रांच भी लगाई गई थी। जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान, बरामदगी का विवरण, सामने आए तथ्य और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एनआईए की मामले में एंट्री हुई। एनआईए ने ही यहां तैनात रहे बैंक मैनेजर अमित को गिरफ्तार किया है।
मैनेजर के साथ ही बैंक के तीन कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। केस डायरी मिलने के बाद एनआईए को अब तक की स्थानीय जांच की पूरी तस्वीर एक जगह उपलब्ध हो जाएगी। एजेंसी इन तथ्यों को अपनी जांच के निष्कर्षों के साथ मिलाकर देख सकती है, जिससे जांच में सामने आए नए बिंदुओं की पहचान होने की संभावना है। एनआईए का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि नकली नोटों का नेटवर्क किस स्तर तक फैला है और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा था। संदिग्ध लोगों के संपर्क, गतिविधियां और लेन-देन भी जांच के दायरे में हैं। स्थानीय पुलिस के निष्कर्षों और केंद्रीय एजेंसी की पड़ताल के बीच सामने आने वाली समानताएं और अंतर आगे की जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।जांच का दायरा अब बैंक के उन खातों तक पहुंच सकता है, जिनसे बड़ी मात्रा में नकदी निकाली गई। घंटाघर के सोफिया मार्केट में करेंसी चेस्ट से सटी शाखा में महानगर के कई बड़े कारोबारियों के खाते संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद जांच एजेंसियां नकदी निकासी के पैटर्न को भी परख सकती हैं। यह देखा जा सकता है कि संबंधित खाताधारकों ने किस तारीख को कितनी नकदी निकाली और उस रकम का आगे इस्तेमाल किस तरह किया गया। खास तौर पर बड़ी या असामान्य नकदी निकासी को जांच के नजरिये से देखा जा सकता है।


