नई दिल्ली । साल 2022 में क़रीब 19.8 मिलियन लोग कार्डियोवस्कुलर डिसीज की वजह से मारे गए, जो पूरी दुनिया में हुई कुल मौतों का लगभग 32 प्रतिशत है। इनमें से क़रीब 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आँकड़ों के अनुसार, हृदय रोग मौत का सबसे बड़ा कारण बन चुका है। यह आँकड़ा और भी चौंकाने वाला है कि 70 साल से कम उम्र में हुई मौतों में से लगभग 38 प्रतिशत दिल की बीमारियों से संबंधित थीं। ऐसे में यह जानना बेहद ज़रूरी है कि हम अपने दिल को इन गंभीर बीमारियों से कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक़, ज़्यादातर कार्डियोवस्कुलर बीमारियों को जीवनशैली में सुधार और जोखिम कारकों को नियंत्रित करके रोका जा सकता है। उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त ग्लूकोज़, लिपिड प्रोफाइल का बढ़ा हुआ स्तर और मोटापा ऐसे जोखिम कारक हैं, जिन्हें व्यक्ति अपनी आदतों में बदलाव करके नियंत्रित कर सकता है। जब इन सभी जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जाता है, तो दिल की बीमारियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों ने दिल को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक व स्ट्रोक से बचने के लिए 8 ऐसी आदतों को छोड़ने की सलाह दी है, जिन पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते। इनमें सबसे पहले है धूम्रपान, जिसमें सिगरेट, वैप्स और निकोटीन पाउच जैसी आदतें शामिल हैं। ये आदतें रक्त वाहिकाओं को नुक़सान पहुँचाती हैं, रक्तचाप बढ़ाती हैं और दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ाती हैं। दूसरा, अपने रक्तचाप को नियंत्रित न रखना भी दिल के लिए बहुत मुश्किल पैदा करता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर का जोखिम बढ़ता है। इसलिए नियमित रूप से रक्तचाप की निगरानी और जीवनशैली में बदलाव ज़रूरी है। तीसरा, स्लीप एप्निया की समस्या, जिसमें रात में साँस रुक-रुक कर आती है, केवल नींद ख़राब करने वाली नहीं है, बल्कि यह दिल पर दबाव डालती है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाती है। चौथा, रक्त शर्करा का लगातार उच्च रहना लंबे समय में रक्त वाहिकाओं को नुक़सान पहुँचाता है, जिससे दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ता है, भले ही आपको मधुमेह का निदान न हुआ हो। पाँचवाँ, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड्स, जिनमें ज़्यादा नमक, अस्वस्थ वसा और अतिरिक्त चीनी होती है, कोलेस्ट्रॉल को तेज़ी से बढ़ाते हैं और दिल के स्वास्थ्य के लिए सबसे ज़्यादा हानिकारक होते हैं।
छठवाँ, दिनभर बैठे रहना एक ऐसी आदत है जिसे बदलने की सख़्त ज़रूरत है, क्योंकि यह शारीरिक निष्क्रियता दिल के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। सातवाँ, रोज़ाना 7 घंटे से कम नींद लेना आपके शरीर में रक्तचाप और तनाव दोनों को बढ़ाता है, साथ ही सूजन को भी बढ़ाता है, जिससे समय के साथ दिल को नुक़सान पहुँचता है। आख़िर में, हर समय तनाव में रहना और उच्च कॉर्टिसोल स्तर आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर दबाव डालता है। इसलिए मन को शांत करने और नियमित व्यायाम के साथ तनाव के स्तर को कम करने पर काम करना चाहिए ताकि दिल स्वस्थ रह सके। आजकल दुनियाभर में दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। इसीलिए विशेषज्ञ तनाव रहित जीवन जीने की सलाह दे रहे हैं।


