नई दिल्ली । गौतम अडानी के नेतृत्व वाली कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) ब्रिटेन के सबसे बड़े पोर्ट ऑपरेटर एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (एबीपी) में हिस्सेदारी खरीदने की योजना बना रही है। यदि यह रणनीतिक सौदा सफल होता है, तो अडानी समूह का साम्राज्य भारत से लेकर ब्रिटेन तक फैल जाएगा। यह कदम अडानी ग्रुप की वैश्विक बंदरगाहों में उपस्थिति को और अधिक मजबूत करेगा और दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी बनने के उसके महत्वाकांक्षी लक्ष्य को एक बड़ी गति प्रदान करेगा।
जानकारी के अनुसार, एबीपी की लगभग 63.9 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है। वर्तमान में यह हिस्सेदारी कनाडा के दो प्रमुख पेंशन फंड- कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) और आंटारियो म्युनिसिपल इम्प्लॉइज रिटायरमेंट सिस्टम के पास है। दोनों निवेशकों ने अपनी-अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बैंकरों की नियुक्ति कर दी है। एबीपी इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में कुल 21 बंदरगाहों का संचालन करता है। इनमें ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह इमिंघम और प्रमुख आयात बंदरगाह साउथेम्प्टन शामिल हैं। यह कंपनी ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा संभालती है। वर्ष 2025 में एबीपी ने 42.5 मिलियन टन बल्क कार्गो तथा 3.1 मिलियन कंटेनर और रोल-ऑन/रोल-ऑफ यूनिट्स का सफलतापूर्वक संचालन किया था। इस दौरान कंपनी का राजस्व 819.8 मिलियन पाउंड और ऑपरेटिंग प्रॉफिट 586.5 मिलियन पाउंड दर्ज किया गया था। लोंगटर्म अनुबंधों से मिलने वाली स्थिर आय के कारण यह संपत्ति अडानी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कई देशों में फैला है अडानी पोर्ट्स का कारोबार
वर्तमान में अडानी पोर्ट्स भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन कर रही है, जिनकी कुल क्षमता 653 मिलियन टन है। इसके अतिरिक्त कंपनी की उपस्थिति इजरायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 501 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता को 1 अरब टन तक पहुंचाना है, जिसके लिए अगले पांच वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश की योजना बनाई गई है। सौदे पर टिप्पणी करते हुए अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी लगातार ऐसे अवसरों का मूल्यांकन करती रहती है जो उसकी दीर्घकालिक रणनीति के अनुकूल हों, हालांकि कंपनी बाजार में चल रही अटकलों पर कोई टिप्पणी नहीं करती।


