नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग द्वारा आगरा में तैनात रहे पूर्व असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर ललित कुमार के लखनऊ स्थित आवास से 1.62 करोड़ रुपये नकद, 13 किलोग्राम सोना, 9 किलोग्राम चांदी और लगभग 35 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद, आम जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर किसी के घर से इतनी बड़ी मात्रा में सोना, चांदी या नकदी मिलती है तो कानून उसके साथ क्या करता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि सिर्फ ज्यादा सोना या चांदी होना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। असली सवाल यह होता है कि क्या उस संपत्ति का वैध स्रोत साबित किया जा सकता है। यदि व्यक्ति खरीद का बिल, आय का वैध स्रोत, बैंक रिकॉर्ड, वसीयत या उपहार से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत कर पाता है, तो आमतौर पर किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। हालांकि, यदि संपत्ति का कोई हिसाब नहीं मिलता, तो मामला गंभीर हो जाता है और आयकर विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है।
यदि आयकर विभाग की तलाशी या छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में सोना, चांदी या नकदी मिलती है और उसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड या वैध स्रोत नहीं होता, तो अधिकारी उसे जब्त कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर यह साबित करने का मौका दिया जाता है कि यह संपत्ति किस आय से खरीदी गई या उसे कैसे हासिल किया गया। यदि व्यक्ति संतोषजनक जवाब नहीं दे पाता है, तो इसे अघोषित आय या अघोषित संपत्ति माना जा सकता है। ऐसे मामलों में अघोषित आय पर 60 प्रतिशत की दर से भारी टैक्स लगाया जाता है। इस टैक्स के साथ 25 प्रतिशत सरचार्ज और 4 प्रतिशत सेस भी जुड़ता है, जिससे कुल टैक्स देनदारी लगभग 78 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, विभाग 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त पेनल्टी भी लगा सकता है, जिसका अर्थ है कि कई मामलों में सोने या चांदी की कुल कीमत का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा टैक्स और जुर्माने के रूप में वसूला जा सकता है। अगर मामला भ्रष्टाचार, हवाला, तस्करी या किसी अन्य गंभीर अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि आपराधिक कार्रवाई और जेल तक की नौबत आ सकती है।हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि घर में रखा हर सोना जब्त नहीं होता। सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) की गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार में सामान्य इस्तेमाल के गहनों को लेकर कुछ राहत दी गई है।
जांच के दौरान, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम तक, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम तक और परिवार के प्रत्येक पुरुष सदस्य के पास 100 ग्राम तक सोने के आभूषणों को सामान्य परिस्थितियों में जब्त नहीं किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन पर कभी सवाल नहीं उठ सकता, यदि आयकर विभाग को आय के स्रोत पर संदेह होता है, तो बाद में इनकी भी जांच की जा सकती है। सोने के बिस्किट, सिक्के या बुलियन के मामले में यह छूट लागू नहीं होती। यदि तलाशी के दौरान ऐसे वस्तुएं मिलती हैं, तो उनके लिए खरीद का बिल या वैध स्रोत बताना अनिवार्य होता है। ऐसा न करने पर विभाग उन्हें अघोषित संपत्ति मानकर कार्रवाई कर सकता है। चांदी के मामले में सोने की तरह कोई तय ग्राम सीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए, यदि बड़ी मात्रा में चांदी मिलती है, तो उसके स्रोत का पूरा हिसाब देना पड़ सकता है। वैध दस्तावेज नहीं होने पर विभाग उसे भी अघोषित संपत्ति मानकर टैक्स और अन्य कार्रवाई कर सकता है। संक्षेप में, कानून की नजर में सबसे अहम बात यह नहीं है कि घर में कितना सोना या चांदी है, बल्कि यह है कि उसका स्रोत कितना पारदर्शी और वैध है। संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड होने पर आमतौर पर कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन बिना हिसाब वाली संपत्ति मिलने पर भारी टैक्स, पेनल्टी और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई तक हो सकती है।


