मुंबई । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह पर अपना शिकंजा कसते हुए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दो पूर्व अधिकारियों सतीश सेठ और गौतम दोषी को मुंबई से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कथित बैंक लोन फ्रॉड से संबंधित सीबीआई की जांच के बाद हुई है। इसी के साथ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिससे समूह की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। सेठ और दोषी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक रह चुके हैं। उन पर भारतीय स्टेट बैंक को 114.98 करोड़ रुपए के कथित लोन फ्रॉड का आरोप है, जिसके संबंध में सीबीआई ने पहले मामला दर्ज किया था।
ईडी ने सीबीआई की इसी शिकायत का संज्ञान लिया है। उन्हें आगे की कस्टडी के लिए दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा। एसबीआई उन 11 बैंकों के कंसोर्टियम का हिस्सा था, जिन्होंने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपए की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी। दूसरी ओर एनसीएलटी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड को दिए गए ऋणों के लिए व्यक्तिगत गारंटर के रूप में अनिल अंबानी की भूमिका को लेकर एसबीआई की याचिका मंजूर कर ली है। अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देने की बात कही है। उल्लेखनीय है कि जून में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ झुनझुनवाला को भी इसी तरह के एक बड़े लोन फ्रॉड के आरोप में गिरफ्तार किया था।


