नई दिल्ली । इस हफ्ते भारतीय कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में जबरदस्त तेजी देखी गई, जहां कंपनियों और संस्थानों ने करीब 27,000 करोड़ रुपये जुटाए। बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के कारण उधार लेने की लागत कम होने से कंपनियों ने बड़े पैमाने पर बॉन्ड जारी करना शुरू कर दिया है। यह तेजी प्रारंभिक वित्त वर्ष में देखी गई सुस्ती के बाद आई है, जब ऊंची यील्ड ने उधारकर्ताओं को बैंक ऋण का सहारा लेने पर मजबूर किया था। इस सप्ताह अच्छी रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड पर यील्ड लगभग 50 से 70 आधार अंक तक कम हुई, जबकि 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में करीब 9 आधार अंक की गिरावट दर्ज की गई। यील्ड में इस अनुकूल कमी ने कंपनियों के लिए बॉन्ड बाजार से पूंजी जुटाना अधिक आकर्षक बना दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हालिया नीतिगत समर्थन और पूंजी जुटाने के लिए उठाए गए कदमों, जैसे विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक (बी) जमा और बाह्य वाणिज्यिक उधारी को बढ़ावा देने से भी पूंजी जुटाने की स्थिति में सुधार हुआ है और रुपये को स्थिर करने में मदद मिली है। बाजार में यह उत्साह अगले हफ्ते भी जारी रहने की उम्मीद है। हाउसिंग ऐंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (हडको), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (आरईसी) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान अगले हफ्ते बॉन्ड से कुल 13,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रहे हैं।
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल और मई) में प्राथमिक बाजारों में काफी कम गतिविधियां देखी गई थीं, जब भारतीय कंपनियों ने घरेलू बॉन्ड बाजार से केवल 1.07 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई थी। यह पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लगभग 58 फीसदी कम थी और वित्त वर्ष 2023 के बाद से किसी भी वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में जुटाई गई सबसे कम रकम थी। इस सप्ताह नेशनल बैंक फॉर फाइनैंसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड डेवलपमेंट (नैबफिड) ने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर के जरिये 5,000 करोड़ रुपये जुटाए। नैबफिड ने 10 साल के बॉन्ड के लिए 7.66 फीसदी और 3 साल वाले बॉन्ड से 7.37 फीसदी यील्ड पर बोलियां स्वीकार कीं। नाबार्ड, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस जैसे अन्य संस्थान भी बॉन्ड बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी में हैं, जबकि बजाज फाइनैंस, टाटा कैपिटल और एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज जैसे निजी क्षेत्र के खिलाड़ी भी सक्रिय रूप से बाजार में मौजूद हैं।


