नए स्टॉक 8 से 17 फीसदी तक महंगे
मुंबई । वैश्विक महंगाई और बाधित सप्लाई चेन का असर अब आम आदमी की सेहत पर भी दिखने लगा है। कच्चे माल, पैकेजिंग व समुद्री परिवहन लागत में उछाल से दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ी है। इसका सीधा असर नए दवा स्टॉक पर पड़ा है, जहां कई आवश्यक दवाओं की कीमतें 8 से 17 फीसदी तक बढ़ गई हैं, जिससे मरीजों के मासिक खर्च में बढ़ोतरी की आशंका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पैरासिटामोल, पेनिसिलिन, सेफालोस्पोरिन जैसी दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट और पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में 40 से 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और एल्युमीनियम भी महंगे हुए हैं। इस वृद्धि का असर पुराने स्टॉक पर सीमित है, लेकिन नए बैच की दवाएं अब अधिक कीमत पर मिल रही हैं, खासकर एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक। फार्मा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल और परिवहन लागत में जल्द राहत नहीं मिली, तो भविष्य में कई और दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी। इससे आम लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बढ़ेगा और मरीजों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।


