नई दिल्ली । महिलाओं के लिए गर्भासन एक अत्यंत प्रभावी योग मुद्रा मानी जाती है, जिसके नियमित अभ्यास से पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द कम होता है, गर्भाशय स्वस्थ रहता है और मासिक चक्र भी संतुलित बनता है। महिलाओं को मासिक धर्म शुरू होते ही कई महिलाएं पेट दर्द, ऐंठन और सूजन जैसी परेशानियों का सामना करना पडता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गर्भासन को बेहद उपयोगी बताया है। यह आसन न केवल प्रजनन स्वास्थ्य को मजबूत बनाता है बल्कि तनाव दूर कर मानसिक शांति भी प्रदान करता है। रोजाना कुछ मिनट इस आसन का अभ्यास शरीर और मन दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होता है। गर्भासन का अर्थ गर्भ स्थित भ्रूण जैसी मुद्रा से है। इस आसन में शरीर को ऐसी स्थिति में लाया जाता है, जो भ्रूण की अवस्था से मिलती-जुलती होती है। यही वजह है कि इसे गर्भासन कहा जाता है।
इसका नियमित अभ्यास तनाव और चिंता को कम करता है, मन को स्थिर करता है और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करता है। महिलाओं के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि यह पीरियड्स की अनियमितता, पीठ और पेट दर्द सहित कई समस्याओं में राहत देता है। इस आसन को करने से पहले थोड़ी तैयारी जरूरी होती है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भासन का प्रयास करने से पहले कुछ दिनों तक कुक्कटासन का अभ्यास करना चाहिए, ताकि शरीर का संतुलन बेहतर हो सके। गर्भासन करने के लिए सबसे पहले पद्मासन में बैठें। इसके बाद हाथों को जांघ और पिंडली के बीच से निकालकर कोहनियों को बाहर की ओर मोड़ें और कान पकड़ने की कोशिश करें। इस दौरान शरीर का भार कूल्हों पर टिका रहना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार 30 सेकंड से 1 मिनट तक इस मुद्रा में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्भासन का नियमित अभ्यास न सिर्फ शारीरिक ताकत बढ़ाता है, बल्कि मानसिक रूप से भी शांति प्रदान करता है। हालांकि सावधानियां भी जरूरी हैं। गर्भासन का अभ्यास सुबह खाली पेट करना अधिक लाभदायक माना जाता है। यदि किसी को गर्दन, कंधे या कमर में दर्द जैसी समस्या हो तो यह आसन विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए। नियमित रूप से किया गया यह आसन महिलाओं की सेहत को बेहतर बनाते हुए मासिक धर्म संबंधी परेशानियों को काफी हद तक दूर कर सकता है। बता दें कि मासिक धर्म शुरू होते ही कई महिलाएं पेट दर्द, ऐंठन और सूजन जैसी परेशानियों से जूझती हैं। यह असहजता कई बार इतनी बढ़ जाती है कि रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित होने लगते हैं।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


