5 हजार साल तक टिके रहने वाले पत्थरों से निर्मित, लागत 101 करोड़ रुपये
नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के सागर जिले के मकरोनिया क्षेत्र स्थित बड़तूमा गांव में 11 एकड़ में बन रहा संत रविदास मंदिर और कला संग्रहालय अब भव्य स्वरूप ले चुका है। करीब 101 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस धार्मिक और सांस्कृतिक परिसर का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। दूर से ही दिखाई देने वाला यह मंदिर अपनी वास्तुकला और निर्माण तकनीक के कारण खास आकर्षण बन गया है।
नागर शैली में बनाए जा रहे इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है, कि इसके निर्माण में लोहा या स्टील का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया है। अयोध्या के राम मंदिर में प्रयुक्त वंशी पहाड़पुर (राजस्थान) के मजबूत पत्थरों से यह मंदिर बनाया जा रहा है, जिन्हें 5 हजार साल तक टिकाऊ माना जाता है। राजस्थान के कुशल कारीगर इन पत्थरों पर बारीक नक्काशी कर रहे हैं। मंदिर के पिलर खड़े हो चुके हैं और शिखर का निर्माण तेजी से जारी है। सितंबर 2023 में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य पहले अगस्त 2025 तक पूरा होना था, लेकिन बजट की कमी के कारण अब इसके मार्च 2026 तक पूर्ण होने की संभावना है। संत रविदास महाराज का मुख्य मंदिर करीब 10 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बनाया जा रहा है।
इंटरप्रिटेशन म्यूजियम भी तैयार
मंदिर परिसर में 20,500 वर्गफीट में एक विशेष इंटरप्रिटेशन म्यूजियम भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें चार गैलरी होंगी। पहली गैलरी में संत रविदास महाराज का जीवन, दूसरी में उनके भक्ति मार्ग और निर्गुण पंथ में योगदान, तीसरी में उनके दर्शन का विभिन्न मतों पर प्रभाव और रविदासिया पंथ, जबकि चौथी गैलरी में उनके काव्य, साहित्य और समकालीन विवरण को प्रदर्शित किया जाएगा।
लाइब्रेरी और संगत हाल भी निर्मित
इसके अलावा 10 हजार वर्गफीट में आधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और संगत हाल बनाया जा रहा है, जहां संत रविदास महाराज के दर्शन और साहित्य का समृद्ध संग्रह उपलब्ध होगा। मंदिर परिसर में एक जलकुंड का प्रतीकात्मक निर्माण भी किया गया है, जो अब आकार ले चुका है।
पीएम मोदी ने किया था भूमिपूजन
गौरतलब है कि 8 फरवरी 2023 को संत रविदास महाकुंभ में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मंदिर की घोषणा की थी। 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सागर पहुंचकर मंदिर का भूमिपूजन किया था, जिसके बाद 1 सितंबर 2023 से निर्माण कार्य शुरू हुआ।


