तांबे की बढ़ती मांग और सप्लाई की कमी से कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
नई दिल्ली । 2026 की शुरुआत में तांबे की कीमतों ने निवेशकों को चौंका दिया है। पिछले एक साल में तांबे की कीमत लगभग 60 फीसदी तक बढ़ चुकी है और यह तेजी की मुख्य वजह बढ़ती मांग और आपूर्ति की कमी है। लंदन मेटल एक्सचेंज का इंडेक्स मार्च 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। तांबा अब सिर्फ घरेलू तारों या विद्युत उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), डेटा सेंटर्स और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी इसकी उपयोगिता तेजी से बढ़ी है। 6 जनवरी 2026 को कॉमेक्स स्पॉट मार्केट में तांबे की कीमत 6.069 डॉलर प्रति पाउंड तक पहुंच गई, जबकि भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर तांबे की कीमत 1,392.95 रुपये प्रति किलो के शिखर पर पहुंची थी। हालांकि, 10 जनवरी को कीमत में थोड़ी गिरावट आई, जो 5.849 डॉलर प्रति पाउंड और 1,278.95 रुपये प्रति किलो पर आ गई। विशेषज्ञों के मुताबिक, तांबे की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई का असंतुलन है। इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर्स और डिफेंस सेक्टर में तांबे की खपत तेजी से बढ़ी है, जबकि मौसम की मार, हड़तालें और उत्पादन की चुनौतियों ने आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके अलावा, डॉलर में कमजोरी और ब्याज दरों में नरमी ने भी निवेशकों को जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया है। अंतरराष्ट्रीय कॉपर स्टडी ग्रुप के अनुसार, 2026 में तांबे की वैश्विक आपूर्ति में करीब 1.5 लाख टन की कमी हो सकती है। इस स्थिति में, जब तक स्टॉक कम रहेगा और मांग बनी रहेगी, तांबे की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी जारी रहने की संभावना है।


