मुंबई । उनकी आँखों में सपने थे, हाथों में सफलता के प्रमाण पत्र और मन में उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें। लेकिन एक पल ऐसा आता है जब सब कुछ तबाह हो जाता है। जो पीछे छूट जाते हैं, वे जीवन भर के लिए तबाह हो जाते हैं। जी हाँ, महाराष्ट्र में छात्रों की आत्महत्याएँ चिंता का विषय बनती जा रही हैं। स्कूल और कॉलेज में टॉपर होने के बावजूद, छात्र इतने बड़े आत्मघाती फैसले क्यों ले लेते हैं? आखिर क्या कारण है कि टॉपर्स निराश होकर आत्महत्या कर रहे हैं? इसको लेकर जागरूक लोगों के बीच चर्चा चल रही है। दरअसल बीते 15 दिनों में राज्य में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली।
* 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के सोलापुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही साक्षी मैलापुरे ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। एमबीबीएस के तीसरे वर्ष में पढ़ रही साक्षी ने दोनों साल अच्छे अंकों से पास किए थे।
* 6 अक्टूबर को नासिक में भी ऐसी ही एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। दोस्तों, ये आखिरी बार है। मुझे ज़िंदगी में कोई दिलचस्पी नहीं है। अभी मेरे पास कोई लक्ष्य या सपने नहीं हैं, इसलिए मेरा अस्तित्व कई लोगों के लिए एक परेशानी है। इसलिए ज़िंदगी से विदा ले रहा हूँ…, 17 साल के आयुष चव्हाण ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कॉलेज की चौथी मंज़िल से छलांग लगा दी। आयुष अपने स्कूल का पूर्व टॉपर भी था। उसने 10वीं कक्षा में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
वहीं पिछले महीने, 24 सितंबर को, 19 वर्षीय अनुराग बोरकर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अनुराग ने मेडिकल नीट परीक्षा में 99.99 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। इसलिए अब यहां सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर इन टॉपर छात्रों ने आत्महत्या क्यों की?
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