पूर्व जज ने सीजेआई गवई को ही जूता फेंकने की घटना का जिम्मेदार बताया
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने भारत के सीजेआई बीआर गवई को ही जूता फेंके जाने वाली घटना का जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों को कोर्ट में कम बात करनी चाहिए प्रवचन नहीं देने चाहिए। वकील राकेश किशोर ने कोर्ट में ही सीजेआई गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। किशोर का दावा था कि वह सीजेआई की टिप्पणियों से आहत था।
पूर्व जज काटजू ने एक्स पर लिखा- मैं सीजेआई पर जूते फेंके जाने की निंदा करता हूं, लेकिन उन्होंने खजुराहो में भगवान विष्णु की मूर्ति से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए खुद ही इस घटना को न्योता दिया था। उन्होंने कहा था कि आप कहते हैं कि आप विष्णु के बहुत बड़े भक्त हैं। जाएं और जाकर देवता से कहें कि वह खुद ही कुछ करें। उन्होंने आगे लिखा कि ऐसी टिप्पणियों की कोई जरूरत नहीं थी, ये अनुचित थीं और गैर जरूरी थीं। इसका मामले के कानूनी मुद्दों से कोई लेना देना नहीं था। जजों को कोर्ट में कम बोलना चाहिए, प्रवचन, उपदेश नहीं देने चाहिए।
वहीं वकील राकेश किशोर ने सीजेआई गवई को लेकर कहा कि बात यह है कि मैं बहुत ज्यादा आहत हुआ कि 16 सितंबर को चीफ जस्टिस की कोर्ट में किसी व्यक्ति ने जनहित याचिका लगाई थी। तो गवई साहब ने पहले तो उसका पूरी तरह से मजाक उड़ाया। सीजेआई ने यह कहा कि आप मूर्ति से प्रार्थना करो जाकर, मूर्ति से कहो कि अपना सिर खुद दोबारा बना ले। किशोर ने कहा कि ठीक है उस आदमी को रिलीफ नहीं देनी थी, तो मत दीजिए, लेकिन ऐसा मजाक भी मत कीजिए। फिर उससे कहा कि आप उसी मूर्ति के सामने जाकर ध्यान लगाएं। अन्याय यह किया कि उसकी याचिका को खारिज भी कर दिया। इन चीजों को लेकर आहत था।
बेंगलुरु पुलिस ने वकील किशोर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया कि अखिल भारतीय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष भक्तवचला की शिकायत के बाद वकील राकेश किशोर के खिलाफ कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।


