नई दिल्ली । गंभीर और जटिल बीमारी मिर्गी के दौरे किसी भी समय अचानक आ सकते हैं, जिससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है। इस बीमारी से शरीर में झटके आने लगते हैं या होश में रहते हुए भी असामान्य हरकतें दिखाई दे सकती हैं। मिर्गी का इलाज मुख्य रूप से दवाओं के जरिए किया जाता है, लेकिन कई मामलों में मरीज नियमित दवाओं के बावजूद पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाते और उन्हें समय-समय पर दौरे आते रहते हैं। ऐसे में योग एक प्रभावी और प्राकृतिक सहायक विकल्प के रूप में सामने आ रहा है, जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को संतुलित करने और तनाव को कम करने में मददगार साबित हो सकता है। आयुष मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, योग का नियमित अभ्यास न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि मस्तिष्क की नसों पर सकारात्मक असर डालकर उनकी कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाता है। योग विशेषज्ञ बताते हैं कि मिर्गी से पीड़ित लोगों के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम बेहद लाभकारी है। यह प्राणायाम मस्तिष्क में संतुलन और स्थिरता लाने का कार्य करता है।
रोजाना 10 से 15 मिनट तक अनुलोम-विलोम करने से मानसिक तनाव घटता है और दौरे की संभावनाएं भी कम हो सकती हैं। इसी तरह कपालभाति प्राणायाम को भी मिर्गी में उपयोगी माना गया है। इसमें तेज गति से सांस को बाहर निकालने और पेट को अंदर खींचने की प्रक्रिया होती है। यह क्रिया मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय कर उनमें ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाती है। नतीजतन नर्वस सिस्टम मजबूत होता है और मानसिक अस्थिरता दूर होती है। साथ ही, यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। योगासन की बात करें तो ताड़ासन को मिर्गी के मरीजों के लिए खासतौर पर लाभकारी बताया गया है। इस आसन में शरीर पूरी तरह सीधा होता है और हाथों को ऊपर खींचने से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है।
इससे न केवल शरीर का संतुलन सुधरता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया से दिमाग को शांति मिलती है, जिससे दौरे का खतरा घट सकता है। वहीं, हलासन मस्तिष्क की कोशिकाओं को अधिक सक्रिय करता है। इस आसन को करने से सिर की ओर रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिससे मस्तिष्क का संतुलन और कार्यप्रणाली बेहतर होती है। साथ ही यह पाचन और रीढ़ की हड्डी के लिए भी लाभकारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मिर्गी से पीड़ित लोग यदि चिकित्सक की देखरेख में दवाओं के साथ योग को जीवनशैली में शामिल करें तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।


