नई दिल्ली । ब्रह्मांड की शुरुआत को समझने की कोशिश में वैज्ञानिकों को एक नई रोशनी मिली है। जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने एक लाल बिंदु जैसी चमक पकड़ी है, जो बिग बैंग के करीब 600 मिलियन साल बाद की है। इस छोटी-सी लाल रौशनी को वैज्ञानिकों ने क्यूएस O1 नाम दिया है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट इग्नास जुओज़बैलिस की टीम का कहना है कि असल में एक ब्लैक होल हो सकता है, जिसकी ताकत 5 करोड़ सूर्यों के बराबर है। अगर ये खोज सही साबित होती है तो ये ब्रह्मांड के शुरुआती ब्लैक होल बनने के सबूतों में से पहला होगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ये या तो “डायरेक्ट कोलैप्स ब्लैक होल” का नतीजा हो सकता है, जहां गैस का बादल सीधे ब्लैक होल में ढह गया, या फिर ये “प्राइमॉर्डियल ब्लैक होल” हो सकता है, जो बिग बैंग के तुरंत बाद बने थे। हालांकि, इन दोनों ही थ्योरीज़ की अभी और जांच की जरूरत है।
पेपर अभी पीयर-रिव्यू के लिए गया है, यानी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इतना तय है कि ये छोटे-छोटे लाल बिंदु हमें ब्रह्मांड के जन्म के बारे में बड़ी और चौंकाने वाली जानकारी देने वाले हैं।अब तक माना जाता रहा है कि ब्रह्मांड की शुरुआत में तारों, आकाशगंगाओं और ब्लैक होल्स का जन्म हुआ, लेकिन उनकी असली कहानी समझना मुश्किल रहा है। वैज्ञानिकों ने सैकड़ों ऐसे लाल बिंदु देखे हैं। लेकिन ये क्या हैं, इस पर बहस जारी है। कुछ कहते हैं ये तारों के समूह हैं, तो कुछ इन्हें शुरुआती ब्लैक होल मानते हैं। मुश्किल ये है कि ब्लैक होल आमतौर पर एक्स-रे किरणों के साथ दिखते हैं, लेकिन इन लाल बिंदुओं के आसपास वो एक्स-रे रोशनी नहीं दिखती। लेकिन खास बात ये है कि ब्लैक होल तो बहुत बड़ा है, पर उसके आसपास की गैलेक्सी बेहद छोटी। यानी ब्लैक होल अपने आप में ज्यादा ‘नंगा’ नजर आ रहा है। इससे ये संकेत मिलता है कि शायद शुरुआती ब्रह्मांड में पहले ब्लैक होल बने और फिर उनके आसपास गैलेक्सी ने आकार लिया।
वीरेंद्र/ईएमएस 06 सितंबर 2025
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