नई दिल्ली । देश में रह रहे या अवैध रूप से प्रवेश करने वाले विदेशियों के लिए सख्त कानून सोमवार से लागू हो गया। भारत सरकार के नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के तहत बिना वैध पासपोर्ट या वीजा के भारत में प्रवेश करने पर पांच साल जेल और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लग सकता है। नए नियम के मुताबिक यदि प्रवेश, निवास या निकास जाली पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के आधार पर की गई है तो 2 से 7 साल की जेल और 1 लाख से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना भरना होगा। भारत सरकार का यह नया कानून 1 सितंबर 2025 से लागू हो गया है। केंद्र ने इसे संसद के बजट सत्र में पारित होने के बाद अधिसूचित किया है।
सरकार द्वारा लाए गए नए कानून इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 ने चार पुराने कानूनों– फॉरेनर्स एक्ट, 1946, पासपोर्ट (एंट्री इनटू इंडिया) एक्ट, 1920, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट, 1939 और इमिग्रेशन (कैरियर्स लायबिलिटी) एक्ट, 2000 निरस्त कर दिया है। सभी कानून इस कानून में समाहित हैं। इसका उद्देश्य विदेशियों के प्रवेश, निवास और प्रस्थान को नियंत्रित करने के लिए एक मजबूत और एकीकृत ढांचा तैयार करना है। यह कानून भारत की सीमाओं की सुरक्षा और अवैध एमीग्रेसन पर अंकुश लगाने की दिशा में अहम कदम है।
इमीग्रेशन एंड फॉरेनर एक्ट 2025 के नियम 1 सितंबर से लागू हुए, अप्रैल 2025 में यह बिल संसद में पारित हुआ था। इस बिल के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को विदेशी नागरिकों की भारत में स्क्रूटनी और उन पर कार्रवाई के कानूनी अधिकार दिए गए हैं। इस बिल के तहत नियमों का उल्लंघन कर भारत में आए विदेशी नागरिकों को तुरंत डिपोर्ट करने के लिए ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के पास संवैधानिक अधिकार होगा और वह संबंधित राज्यों से कोआर्डिनेट करेगा। यही नहीं इन नियमों के तहत अवैध तरीके से जिस संस्थान में चाहे वह होटल हो शिक्षण संस्थान हो या फिर और कुछ भी, वहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही हो तत्काल प्रभाव से उसका रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जाएगा।
विदेशी नागरिकों का डेटाबेस राज्य सरकार बरकरार रखेगी। समय-समय पर यह ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन जानकारी देती रहेंगी। भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले विदेशी नागरिक जो कि भारतीय वीजा और पासपोर्ट की आड़ में भारत में रहते हैं, उन पर लगाम लगाने यह बिल लाया गया था। गृह मंत्रालय ने इसका नोटिफिकेशन जारी किया है और तत्काल प्रभाव से यह नियम लागू होंगे। कानून के तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को विदेशी छात्रों का विवरण पंजीकरण अधिकारियों के साथ साझा करना जरुरी है। इसी तरह अस्पतालों, नर्सिंग होम और आवास सुविधा वाले चिकित्सा संस्थानों को भी विदेशी मरीजों की जानकारी देनी होगी। केंद्र सरकार को अब विदेशियों के प्रवेश, प्रस्थान या आवाजाही को प्रतिबंधित करने, उनके बायोमेट्रिक्स लेने और विशिष्ट गतिविधियों में उनकी भागीदारी पर रोक लगाने का अधिकार है।
नए कानून का मकसद अवैध आव्रजन, मानव तस्करी और जाली दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकना है। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अहम है, जहां सीमा पार से अवैध प्रवेश की घटनाएं सामने आती हैं, जैसे पश्चिम बंगाल, असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्य। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और विदेशियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी के लिए बनाया गया है।
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