नई दिल्ली । नई शिक्षा नीति के तहत बनाए गए पाठ्यक्रम के हिसाब से कक्षा 3 और कक्षा 6 की किताबें 2024- 25 से पढ़ाई जानी थी। बदले हुए पाठ्यक्रम की किताबें अभी तक एनसीईआरटी सभी राज्यों में उपलब्ध नहीं करा पाई है। जिसके कारण किताबों को महंगी कीमत पर बेचा जा रहा है।
अगस्त का दूसरा सप्ताह बीतने जा रहा है। अभी तक स्कूलों में बच्चों को एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तके उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। ई-कॉमर्स के प्लेटफार्म पर 10 गुना ज्यादा कीमत पर किताबें बिक रही हैं। वही एनसीईआरटी की नकली किताबें भी बाजार में बिक रही हैं।
मध्य प्रदेश में पकड़ा गया था नकली किताबों का जखीरा
मध्य प्रदेश में एनसीईआरटी की नकली किताबों का बड़ा भारी जखीरा पकड़ा गया था। एनसीईआरटी बार-बार पाठ्यक्रम बदल देते हैं। लेकिन किताबें उपलब्ध नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण बाजार में नकली किताब छपकर आ जाती है।बाजार में नकली किताब अभिभावक और बच्चे खरीदतें हैं। अभी पुलिस ने छापेमारी करके नकली किताबों को पकड़ा था।स्कूल संचालकों को जेल में भी भेजा था। उसके बाद से सप्लाई और भी बाधित हो गई है।
पर्याप्त सप्लाई नहीं
पुस्तक विक्रेताओं का कहना है, एनसीईआरटी की कई किताबों की सप्लाई मांग के अनुसार नहीं है। बहुत कम संख्या में किताबों की आपूर्ति की जा रही है।जिसके कारण छात्र और अभिभावक परेशान हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर 10 गुना कीमत पर उपलब्ध
ई-कॉमर्स के प्लेटफार्म पर एनसीईआरटी की किताबें 5 से 10 गुना महंगी कीमत पर बेची जा रही हैं। कक्षा 6 की 65 रुपए की किताब 300रूपये में उपलब्ध है। कक्षा 3 की किताबों की लगभग यही स्थिति है। ई-कॉमर्स के प्लेटफार्म मे एनसीईआरटी की किताबों में मुनाफाखोरी की जा रही है। किताब माफिया ने कमाई का यह नया रास्ता खोज लिया है। इसमें अधिकारियों की मिलीभगत भी बताई जा रही है।


