● मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और परिसीमन को लेकर उठाए सवाल, आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा की मांग
● एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 के विरोध में उतरा मंच, ग्रामसभा के अधिकार और खनिज संसाधनों पर राज्य की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की अपील
● महिलाओं की सुरक्षा, छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर
● स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने और खनन कंपनियों को विकास के प्रति जवाबदेह बनाने का आह्वान
ब्यूरो रिपोर्ट
दुमका। जल-जंगल-जमीन, संवैधानिक अधिकारों, रोजगार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के सवाल पर शनिवार को दुमका के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आदिवासी-मूलवासी एकता की आवाज बुलंद हुई। आदिवासी मूलवासी एकता मंच के तत्वावधान में आयोजित लोकतांत्रिक रैली में आदिवासियों, मूलवासियों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लेकर राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर की। रैली के माध्यम से मंच ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, परिसीमन, एमएमडीआर संशोधन अधिनियम-2026, महिला सुरक्षा, छात्र हितों और स्थानीय रोजगार समेत प्रमुख मुद्दों को उठाते हुए सरकार के समक्ष मांगें रखीं।
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मतदाता सूची और परिसीमन पर जताई चिंता
मंच ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने आशंका जताई कि प्रक्रिया में खामियों के कारण ग्रामीण, गरीब और आदिवासी समुदाय के वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से कट सकते हैं। मंच ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के नाम पर आदिवासी समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की रक्षा पर जोर देते हुए मंच ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की।
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एमएमडीआर संशोधन के खिलाफ आवाज बुलंद
रैली में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई। मंच के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि संशोधन से खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड के अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों के दोहन में स्थानीय समुदायों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। ग्रामसभाओं के अधिकारों की रक्षा, खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई।
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महिला सुरक्षा और छात्र हितों पर जोर
मंच ने महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताते हुए मामलों की त्वरित एवं निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। शैक्षणिक संस्थानों तथा सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पर भी जोर दिया गया। वहीं, आदिवासी और मूलवासी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रावासों में बेहतर सुविधाएं, भवनों की मरम्मत तथा छात्रवृत्ति और वजीफे का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई। मंच ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी दूर किए बिना युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया जा सकता।
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स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
रैली में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। मंच ने कहा कि झारखंड में खनन और औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने के बावजूद स्थानीय आदिवासी-मूलवासी युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। कंपनियों में स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने और खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं तथा आजीविका के विकास के लिए कंपनियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई।
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संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुटता की अपील
रैली के समापन पर मंच ने कहा कि जल-जंगल-जमीन, रोजगार, शिक्षा, महिला सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे झारखंड के भविष्य से जुड़े हैं। संगठन ने राज्य की जनता और सरकार से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। साथ ही नागरिकों से मतभेदों से ऊपर उठकर संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।


