रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 को सदन से मंजूरी दे दी गई। इससे पहले वर्ष 2025 में पारित विधेयक को कुछ आपत्तियों के कारण लोकभवन से वापस कर दिया गया था। सरकार ने उसमें आवश्यक संशोधन कर नया विधेयक पेश किया, जिसे चर्चा के बाद सदन ने स्वीकृति प्रदान कर दी। मंत्री सुदिव्य कुमार ने विधेयक की प्रस्ताव को सदन पटेल पर रखा। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विधेयक को पेश करते हुए प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि यह कानून राज्य में उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार सभी कमियों और त्रुटियों को दूर कर विधेयक को पुख्ता रूप दिया गया है।
कुलपति का चयन अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री मिलकर करेंगे। चयन खोज समिति द्वारा सुझाए गए पैनल से होगा। अंतिम नियुक्ति राज्यपाल के माध्यम से की जाएगी। यदि पैनल उपयुक्त न लगे तो नया पैनल मांगा जा सकेगा। चयन प्रक्रिया रिक्ति से 6 माह पहले शुरू होगी। नियुक्ति प्रक्रिया रिक्ति से एक माह पहले पूरी करना अनिवार्य कुलसचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। कुलपति चयन के लिए एक चार सदस्यीय सर्च कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें राज्यपाल द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद (अध्यक्ष) किसी राष्ट्रीय स्तर के संस्थान/विश्वविद्यालय का प्रमुख, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रतिनिधि, राज्य सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शमिल होंगे। समिति 3 से 5 योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार करेगी। नाम वर्णमाला क्रम में होंगे, कोई वरीयता नहीं दी जाएगी। मत बराबर होने पर अध्यक्ष का वोट निर्णायक होगा। कुलपति के कार्यकाल और पात्रता अधिकतम आयु 65 वर्ष (आवेदन के समय) और कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। प्रदर्शन संतोषजनक होने पर 2 वर्ष तक विस्तार (70 वर्ष की सीमा तक) किया जाएगा।
एक बार कार्यकाल पूरा होने के बाद उसी विश्वविद्यालय में पुनर्नियुक्ति नहीं होगी। विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव भाजपा विधायक राज सिन्हा ने रखा, जिसका समर्थन अमित कुमार यादव ने किया। वहीं जयराम कुमार महतो ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताई। हालांकि सरकार ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए विधेयक को सीधे पारित कराने का निर्णय लिया।


