जरमुंडी । विभिन्न थाना क्षेत्रों में आधा दर्जन से अधिक लूट व छिनतई की घटना को अंजाम देनेवाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में मंगलवार को जेल भेज दिया गया है। बता दें कि पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी जरमुंडी के नेतृत्व में गठित छापेमारी दल के द्वारा अंतर्राज्यीय गिरोह के दोनों आरोपी बदमाशों को गुप्त सूचना के आधार पर एसबीआई जरमुंडी शाखा के पास से सोमवार को गिरफ्तार किया गया था। दोनों अंतर्राज्यीय चोर एवं लुटेरा गिरोह के सदस्य बताये जाते हैं। गिरफ्तार बदमाश आए दिन विभिन्न बैंक शाखाओं के अंदर एवं बाहर रेकी करते थे तथा बैंक से अत्यधिक मात्रा में कैश पैसा निकालकर जाने वाले ग्राहकों से रास्ते में लूट छिनताई कर अपने बाइक से भाग जाते थे।गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना नाम आशीष लाल (उम्र 37 वर्ष) पिता स्वर्गीय आनंद लाल एवं सन्नी दुसाध (उम्र 28 वर्ष) पिता धनपत दुसाध, दोनों का पता हली शहर,एच के भट्ठा रोड बड़ा तलाब, थाना हली शहर, जिला उत्तरी 24 परगना पश्चिम बंगाल निवासी बताया है। अभियुक्तों के द्वारा देवघर दुमका साहिबगंज सहित पूरे झारखंड बिहार एवं पश्चिम बंगाल के कई स्थानों पर पूर्व में लूट, छिनताई एवं चोरी की बात स्वीकार की गई है।गिरफ्तार बदमाशों ने अपने अन्य तीन साथियों के साथ मिलकर विगत पिछले 4 महीने पहले एसबीआई बासुकीनाथ से निकासी करके आ रहे बाइक सवार एक दंपति के हाथ से बासुकीनाथ काली मंदिर के पास झपट्टा मारकर थैले में रखा 39,500 रूपये लूटने की भी बात स्वीकार की है। जरमुंडी थाना प्रभारी श्यामानंद मंडल ने बताया कि पुनः दिनांक 9 सितंबर को एसबीआई जरमुंडी शाखा में सभी बदमाश मिलकर मोटा पैसा निकालने वाले ग्राहकों पर नजर रखे हुए थे एवं बाहर निकल रहे ग्राहकों को लूटने के प्रयास में थे। इसी बीच पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर तत्परता दिखाते हुए इन्हें पकड़ लिया गया। विभिन्न सीसीटीवी फुटेज के कई कांडों में उनके संलपिता की पुष्टि हुई है। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से उनका एक ग्लैमर बाइक एवं दो कीपैड फोन जप्त किया गया है। इन दोनों फोन के अंदर फर्जी सिम कार्ड का प्रयोग अभियुक्तों के द्वारा किया जा रहा था। अभियुक्तों ने यह भी बताया कि पुलिस से बचने के लिए एक घटना को अंजाम देने के बाद वह सिम कार्ड को विनष्ट कर देते थे अथवा दोबारा बहुत दिनों तक उसका उपयोग नहीं करते थे। गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास से ज्ञात हुआ कि उनके विरुद्ध चोरी एवं लूट के करीब आधा दर्जन से अधिक कांड पूर्व में दर्ज हैं एवं कई बार जेल भी जा चुके हैं।
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