आरक्षण को लेकर बचाव की मुद्रा में आई सरकार
नई दिल्ली । लैटरल भरती को लेकर जिस तरह का विरोध देशभर में हुआ है। उसको देखते हुए अब केंद्र सरकार (यूपीएससी) संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से रिक्त पदों की भर्ती के लिए मुहिम चलाने की सोच रही है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पद रिक्त हैं। सरकार लैटरल भरती से खाली पदों को भरना चाहती थी। आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को अब अपने कदम पीछे हटाने पड़ रहे हैं।
राज्य सरकारों के पास भी भारतीय सेवा से जुड़े हुए अधिकारियों की कमी बनी हुई है। राज्यों में नए-नए जिले बने हैं। आबादी भी लगातार बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पद भी बढ़ने पर विचार हो रहा है।
राज्यों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कमी होने के कारण राज्य, केंद्र की प्रतिनियक्ति पर कैडर के अधिकारियों को केंद्र में नहीं भेज पा रहे हैं। 2012 के बाद से केंद्र सरकार नेभारतीय प्रशासनिक सेवा के पदों का पुनरीक्षण भी नहीं किया है।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 6 साल पहले लैटरल एंट्री के माध्यम से भरतियाँ शुरू की थी। अभी तक 200 पदों की भर्ती की जा चुकी है। 2014 में केंद्र सरकार की प्रति नियुक्ति पर 14 फ़ीसदी पद भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के थे। 2021 में यह संख्या घटकर मात्र 6 फ़ीसदी रह गई है। राज्यों में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी पर्याप्त संख्या में नहीं है। जिसके कारण राज्य सरकार ने अपने अधिकारियों को केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजती है।
हर साल भारतीय सेवा के लिए अधिकारियों की नियुक्ति यूपीएससी के माध्यम से किए जाने का निर्णय केंद्र सरकार ले रही है। 15-20 वर्ष की सर्विस के बाद भारतीय सेवा के अधिकारी उच्च पदों पर सेवा देने के लिए प्रशिक्षित होते हैं। केंद्र सरकार अभी उच्च पदों पर सीधे भरती करना चाहती थी। लेकिन जिस तरह से इस बार आरक्षण को लेकर पूरे देश भर में विरोध हुआ है। उसको देखते हुए अब केंद्र सरकार अगले दो-तीन सालों में यूपीएससी के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा पदों पर भर्ती करेगी। सरकार के पास अब इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। सरकार को बचाए रखना है, तो उसे आरक्षण के मुद्दे पर अपने आप को बचाकर चलना पड़ेगा। गठबंधन के सहयोगी दल नाराज ना हो। किसका ध्यान रखना अब केंद्र सरकार के लिए जरूरी हो गया है। गठबंधन की सरकार होने से केंद्र सरकार कोई रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है। केंद्र सरकार सभी विभागों को निर्देशित करने जा रही है, कि वह खाली पदों की भर्ती के लिए यूपीएससी को जानकारी दे। ताकि समय रहते भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सके।


