● एसपी कॉलेज से समाहरणालय तक छात्र समन्वय समिति के नेतृत्व में निकाली गई ‘छात्र अधिकार आक्रोश महारैली’
● दो शैक्षणिक सत्रों की छात्रवृत्ति अब तक लंबित, जर्जर छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे विद्यार्थी
● मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप कर समस्याओं के त्वरित समाधान और नए भवनों के निर्माण की मांग, दी गई आंदोलन की चेतावनी
ब्यूरो
दुमका : संताल परगना के सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों से आकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. सोमवार को दुमका जिले के कल्याण छात्रावासों की जर्जर स्थिति, मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव और लंबित छात्रवृत्ति के विरोध में छात्र-छात्राओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा. छात्र समन्वय समिति, दुमका के बैनर तले बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने एसपी कॉलेज से लेकर समाहरणालय तक ‘छात्र अधिकार आक्रोश महारैली’ निकाली. प्रदर्शन के पश्चात मुख्यमंत्री के नाम एक 10 सूत्री ज्ञापन सौंप कर समस्याओं के तत्काल समाधान की गुहार लगाई गई है.
ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने बताया है कि जिले के कल्याण छात्रावासों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुपात में सुविधाओं का तनिक भी विस्तार नहीं किया गया है. संताल परगना के गरीब और पिछड़े तबके के विद्यार्थी इन्हीं छात्रावासों और छात्रवृत्ति के भरोसे अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण उनकी शिक्षा और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
छात्रों का आरोप है कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्ति अब तक लंबित है, जबकि 2026-27 की प्रक्रिया का भी कुछ पता नहीं है. आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए यह छात्रवृत्ति ही उनकी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है, जिसके बिना वे पढ़ाई छोड़ने को विवश हो सकते हैं.
छात्रावासों की बदहाली का जिक्र करते हुए समिति ने कहा कि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. छात्रावासों में रसोइया, रात्रि प्रहरी और सफाई कर्मियों की भारी कमी है. पेयजल, बिजली, शौचालय और स्वच्छता की स्थिति नारकीय हो चुकी है. छात्रों के लिए न तो पर्याप्त फर्नीचर है, न किचन सामग्री और न ही अध्ययन के लिए पुस्तकालय या खेलकूद की कोई व्यवस्था है.
छात्रों ने अपनी प्रमुख मांगों में कहा है कि लंबित छात्रवृत्ति का अविलंब भुगतान किया जाए, जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत हो और बढ़ती छात्र संख्या को देखते हुए नए छात्रावास भवनों का निर्माण कराया जाए. सभी छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएं बहाल करते हुए कर्मियों की नियुक्ति हो. साथ ही दुमका जिले के सभी कल्याण छात्रावासों का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. छात्र समन्वय समिति ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अब केवल कोरे आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं. यदि उनके मुद्दों पर लिखित कार्ययोजना बनाकर स्पष्ट समयसीमा के भीतर जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई, तो छात्र-छात्राएं अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण और चरणबद्ध आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगे.


