लेह । अपनी बदलती रंगत के कारण लद्दाख स्थित पांगोंग त्सो झील दुनिया भर के पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रही है। पर्यटक इसे ‘रंग बदलने वाली झील’ के नाम से जानते हैं, जबकि सोशल मीडिया पर कई लोग इसे मजाकिया अंदाज में ‘गिरगिट की फुफेरी बहन’ भी कह रहे हैं। इसकी खासियत है कि यह झील दिनभर में कई बार अपना रंग बदलती है और हर बार अलग ही नजारा पेश करती है। यही कारण है कि यहां आने वाले सैलानी घंटों तक झील के किनारे बैठकर इसकी बदलती छटा को निहारते रहते हैं। पांगोंग त्सो झील समुद्र तल से करीब 4350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील भारत और चीन की सीमा तक फैली हुई है। इसकी कुल लंबाई लगभग 134 किलोमीटर बताई जाती है, जिसमें से करीब एक तिहाई हिस्सा भारत में और बाकी तिब्बत क्षेत्र में पड़ता है। ऊंचे बर्फीले पहाड़ों और रेगिस्तानी इलाके के बीच स्थित यह झील लद्दाख की सबसे आकर्षक प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार झील का रंग बदलने के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। सुबह सूरज की हल्की किरणें पड़ने पर इसका पानी गहरे नीले रंग का दिखाई देता है। दिन चढ़ने के साथ सूर्य की दिशा बदलती है और झील का रंग फिरोजी, हरा-नीला तथा आसमानी होने लगता है। शाम के समय सूर्यास्त की लालिमा पानी पर पड़ने से झील सुनहरे, नारंगी और गुलाबी रंग में चमकने लगती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पानी में मौजूद सोडियम और अन्य खनिज तत्व, साफ पानी और आसपास के पहाड़ों से पड़ने वाले प्रतिबिंब इस अद्भुत दृश्य को जन्म देते हैं। सर्दियों में यह झील पूरी तरह जम जाती है और बर्फ की सफेद चादर में बदल जाती है। यहां दुर्लभ पक्षियों की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं, जो इस जगह को और खास बनाती हैं। फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ की शूटिंग के बाद इस झील की लोकप्रियता और बढ़ गई। आमिर खान और करीना कपूर पर फिल्माए गए दृश्य यहां शूट किए गए थे, जिसके बाद देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचने लगे।


