दुमका। पूर्व विधायक एवं पूर्व महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति सीता मुर्मू सोरेन ने सोमवार को झारखंड के राज्यपाल को एक पत्र भेजकर संथाल परगना की बदहाल जमीनी हकीकत की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सीता सोरेन ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि जनहित में इन गंभीर समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए जाएं।
राज्यपाल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि संथाल परगना प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध होने के बाद भी विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। आज भी यहां की आम जनता अपनी रोजमर्रा की मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष करने को मजबूर है। क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज की समस्या, गहराता पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और अस्पतालों में डॉक्टरों व जीवनरक्षक दवाओं का अभाव जैसी स्थितियां विकराल रूप ले चुकी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदहाली के कारण स्थानीय मरीजों को इलाज के लिए रांची या अन्य बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है।
सीता सोरेन ने इस प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए राज्यपाल के समक्ष एक विशेष प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की है कि राज्यपाल वर्ष में कुछ महीने संथाल परगना की उप-राजधानी दुमका में प्रवास करें। उनका मानना है कि महामहिम की सीधी उपस्थिति से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सक्रिय होगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकेगी।
उन्होंने विशेष रूप से सावन महीने का जिक्र करते हुए कहा कि इस पावन अवसर पर देवघर, बासुकिनाथ और दुमका में लाखों की संख्या में शिवभक्त और कांवरिये आते हैं। इस महत्वपूर्ण समय के दौरान यदि राज्यपाल दुमका स्थित राजभवन में प्रवास करते हैं, तो पूरा प्रशासनिक अमला जमीन पर मुस्तैद रहेगा। इससे क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का सीधा आकलन हो सकेगा, जिससे स्थानीय जनता में एक सकारात्मक संदेश जाएगा और उन्हें बेहतर न्याय व सुशासन की उम्मीद मिलेगी।


