गोपीकांदर । प्रखंड के महुलडाबर गांव में बीते एक सप्ताह के भीतर चार लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और खौफ का माहौल बना हुआ है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक इन मौतों के सटीक कारणों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जानकारी के अनुसार, मृतकों में 60 वर्षीय मंगल सोरेन, 15 वर्षीय मनोज सोरेन और एक 65 वर्षीय महिला शामिल हैं। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति महुलडाबर में ही गंभीर रूप से बीमार पड़ा था, जिसकी मौत अमरापाड़ा प्रखंड के कठालडीह गांव में होने की सूचना मिली है।
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नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण
गांव के ही एक निवासी फायर मरांडी ने बताया कि महुलडाबर में इस समय बुखार, मलेरिया, टाइफाइड और पीलिया जैसी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। बीमारी फैलने का मुख्य कारण पीने के पानी का गंभीर संकट है। गांव के सभी चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिसके कारण ग्रामीण मजबूरन नाले का दूषित और गंदा पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महुलडाबर गांव में नवेली कोल कंपनी द्वारा कोयला निकालने का काम तो किया जा रहा है, लेकिन सरकार और कंपनी में से कोई भी ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने पर ध्यान नहीं दे रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग ने लगाया मेडिकल कैंप, मिले मलेरिया के मरीज
गांव में लगातार हो रही मौतों और बीमारी की खबर फैलने के बाद सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम हरकत में आई। गोपीकांदर चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुमित आनंद के निर्देश पर डॉ. हीरालाल मंडल के नेतृत्व में महुलडाबर गांव में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।
इस कैंप में गांव के करीब 45 लोगों के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की गई। जांच के दौरान तीन मरीजों में मलेरिया के लक्षण पाए गए, जबकि अधिकांश लोग वायरल फीवर और लूज मोशन से पीड़ित मिले।
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मेडिकल टीम ने सभी बीमार लोगों को आवश्यक दवाइयां की वितरित
चिकित्सा प्रभारी डॉ. सुमित आनंद ने बताया कि विभाग को फिलहाल तीन लोगों की मौत की ही आधिकारिक जानकारी मिली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन लोगों की मौत किस बीमारी या किस वजह से हुई है, इसका पता लगाने के लिए विभाग जांच कर रहा है।


