नई दिल्ली । गर्मी के मौसम में बढ़ती उम्र के लोगों को गर्मी के कारण शारीरिक थकान, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से निपटने आयुष मंत्रालय शीतली प्राणायाम को दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दे रहा है। यह प्राचीन योगिक श्वास तकनीक शरीर और मन दोनों को ठंडक पहुंचाने का प्रभावी और प्राकृतिक उपाय है। शीतली प्राणायाम एक सरल लेकिन बेहद लाभकारी योग अभ्यास माना जाता है। इसमें साधक जीभ को बाहर निकालकर उसे नली के आकार में मोड़ता है और धीरे-धीरे मुंह के माध्यम से सांस अंदर लेता है। इसके बाद मुंह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ी जाती है। यह प्रक्रिया शरीर की आंतरिक गर्मी को संतुलित करने में मदद करती है और शरीर को भीतर से शीतलता प्रदान करती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ शरीर में गर्मी बढ़ने, तनाव, अनिद्रा और चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। शीतली प्राणायाम इन समस्याओं को कम करने में सहायक साबित हो सकता है।
नियमित रूप से इसका अभ्यास करने से शरीर में ठंडक बनी रहती है, मानसिक शांति मिलती है और तनाव का स्तर कम होता है। इसके अलावा यह गर्मी के कारण होने वाली थकान और बेचैनी को भी दूर करने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्राणायाम का सकारात्मक प्रभाव रक्तचाप और पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। नियमित अभ्यास से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में दर्द, चिंता और नींद से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। शीतली प्राणायाम इन समस्याओं से राहत दिलाने में भी उपयोगी माना जाता है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “स्वस्थ बुढ़ापे के लिए योग” निर्धारित की गई है।
इसी के तहत आयुष मंत्रालय लोगों को ऐसे सरल योग अभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो जीवन के हर चरण में स्वास्थ्य, संतुलन और खुशहाली बनाए रखने में मदद करें। शीतली प्राणायाम भी ऐसे ही प्रभावी अभ्यासों में शामिल है। इसका अभ्यास करने के लिए किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर आरामदायक मुद्रा में बैठ जाएं। आंखें बंद रखें और शरीर को पूरी तरह शिथिल छोड़ दें। इसके बाद जीभ को बाहर निकालकर नली जैसा आकार दें और धीरे-धीरे मुंह से सांस अंदर लें। फिर मुंह बंद करके नाक से सांस बाहर छोड़ें। शुरुआती दौर में इसे पांच से दस बार किया जा सकता है और बाद में अभ्यास के अनुसार इसकी अवधि बढ़ाई जा सकती है।
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