बेरुत । दक्षिणी लेबनान में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी भीषण संघर्ष ने सीमावर्ती इलाकों के भूगोल को पूरी तरह बदल दिया है। हाल ही में सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों और रिपोर्ट्स से यह स्पष्ट हुआ है कि इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के सीमा से लगे इलाकों में सैकड़ों इमारतों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया है। नष्ट की गई इन इमारतों में न केवल रिहायशी घर शामिल हैं, बल्कि मस्जिदें, दवा की दुकानें, कैफे और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठान भी मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल की यह रणनीति गाजा के रफाह और बेत हनून में अपनाए गए विनाशकारी मॉडल से मिलती-जुलती है। इस मॉडल के तहत पहले भीषण हवाई हमले किए जाते हैं और फिर जमीनी बुलडोजर अभियान के जरिए पूरे मोहल्लों को समतल कर दिया जाता है। ताज़ा सैटेलाइट विश्लेषण में सामने आया है कि संघर्षविराम की घोषणाओं के बावजूद इजरायली बुलडोजर और बख्तरबंद वाहन लेबनान के गांवों में सक्रिय हैं। खुदाई मशीनों और सैन्य वाहनों को उन इलाकों में इमारतों का ध्वस्तीकरण करते देखा गया है जो पहले से ही हमलों के कारण क्षतिग्रस्त थे।
इस अभियान की पुष्टि करते हुए इस्राइल के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सीमावर्ती गांवों के घरों को रफाह और बेत हनून मॉडल के तहत ही नष्ट किया जाएगा। उन्होंने इन नागरिक ढांचों को आतंकी चौकियां करार दिया है। इस्राइली सेना का लक्ष्य लेबनान के भीतर लगभग 10 किलोमीटर तक अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करना है। एयरबस द्वारा उपलब्ध कराई गई तस्वीरों के आधार पर किए गए विश्लेषण में पाया गया कि अभियान के शुरुआती 10 दिनों के भीतर ही 22 समुदायों की 523 इमारतें नष्ट कर दी गईं। अयता अल-शाब और अदैसेह जैसे कस्बों में तो पूरी की पूरी सड़कें मलबे में बदल चुकी हैं, जबकि इस्राइल का तर्क है कि हिजबुल्ला इन नागरिक ठिकानों का इस्तेमाल हमलों के लिए कर रहा है।


