नई दिल्ली । सहारा समूह में वर्षों पहले निवेश करने वाले लाखों लोगों की उम्मीदें एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में लगी रहीं। सुनवाई के दौरान एक महिला निवेशक भावुक हो गई और अदालत से हाथ जोड़कर अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की गुहार लगाई। महिला ने कहा कि उसके पति का निधन हो चुका है और परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उसने अदालत से कहा कि जीवनभर की बचत सहारा में फंसी हुई है, अब न्याय दिलाया जाए। महिला की भावुक अपील सुनकर अदालत ने उसकी बात सुनी और कहा कि ऐसे मामलों में निवेशकों की परेशानी को समझा जा रहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सहारा से जुड़े मामलों और निवेशकों के भुगतान की प्रक्रिया पर पहले से सुनवाई चल रही है तथा इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सहारा प्रकरण लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दो कंपनियों को निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास जमा राशि से पात्र निवेशकों को भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन बड़ी संख्या में निवेशक अब भी अपनी रकम मिलने का इंतजार कर रहे हैं। मौजूदा सुनवाई के दौरान अदालत के सामने निवेशकों की परेशानियां फिर प्रमुखता से सामने आईं। अदालत ने संकेत दिया कि लंबित मामलों के साथ निवेशकों के हितों पर भी विचार किया जाएगा। सहारा में निवेश करने वाले लाखों लोगों की नजर अब अदालत के अगले आदेश पर टिकी है, जिससे वर्षों से फंसी उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलने की उम्मीद बनी हुई है।


