● दिशोम मांझी थान एवं जाहेर थान समिति की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया बड़ा फैसला
● युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और रीति-रिवाजों से जोड़ने पर रहेगा खास जोर
● दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू के नेतृत्व में रूपरेखा तय, तैयारियों में जुटा संताल समाज
ब्यूरो
दुमका। तेजी से बदलते आधुनिक दौर में अपनी जड़ों, पारंपरिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए संताल परगना के दुमका में एक सार्थक कदम उठाया जा रहा है। आगामी 10 नवंबर (मंगलवार) को दुमका के दिशोम मांझी थान परिसर में एक विशाल धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यह अहम फैसला रविवार को दिशोम मांझी थान एवं जाहेर थान समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया।
दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित इस बैठक में समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से धर्म सम्मेलन की रूपरेखा पर मुहर लगाई। बैठक को संबोधित करते हुए बीनीलाल टुडू ने समाज में आ रहे बदलावों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग अपनी गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और रीति-रिवाजों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में अपनी पारंपरिक व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं का संरक्षण करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए इस धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
इस सम्मेलन का मुख्य फोकस नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। आयोजन के जरिए बच्चों, युवाओं और विद्यार्थियों को उनके पूर्वजों से मिली समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और उच्च सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा, सम्मेलन में शामिल होने वाले धर्मगुरु समाज और युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस कर सकें और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित हों।
समिति की ओर से जानकारी दी गई कि पिछले वर्ष भी दुमका के बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम में इसी तरह के धर्म सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया था, जिसमें भारी संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। इस बार भी आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए समिति के सदस्यों ने अभी से ही कमर कस ली है और आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
रविवार की इस खास बैठक में समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से टेकलाल मरांडी, सुरेशचंद्र सोरेन, निलेश हांसदा, रामप्रसाद हांसदा, चंद्रनाथ हेंब्रम, बी.डी. किस्कू, सीमांत हांसदा, प्रेम हांसदा, शिवशंकर सोरेन, संदीप मुर्मू, सुनील मरांडी, सुभाष किस्कू, शिवकांत मुर्मू, झुमरी सोरेन, सनी बेसरा, लक्की संतोष मुर्मू, सुनील टुडू, जोसेफ मरांडी, मोहन टुडू, ज्योतिका, मकुलता, निधि, सूरज सोरेन और सिद्धेश्वर मरांडी सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।


