नई दिल्ली । दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय प्रोटीन पाउडर ब्रांड्स की जांच में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी सकते में डाल दिया है। इन प्रोटीन पाउडर्स में भारी धातुएं, कई जहरीले केमिकल्स और यहां तक कि पेस्टिसाइड्स भी पाए गए हैं।
इस खुलास के बाद फिटनेस के प्रति जुनूनी युवाओं और नियमित रूप से जिम जाने वाले लोग चिंता में पड गए हैं। इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि इन हानिकारक तत्वों का लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर ये पेट और शरीर के अन्य अंगों में जमा होकर गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं, जो जानलेवा भी साबित हो सकती हैं। क्लीन लेबल प्रोजेक्ट नामक एक गैर-लाभकारी संगठन ने अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाले 134 प्रोटीन प्रोडक्ट्स की गहन जांच की। इस जांच में कुल 130 प्रकार के टॉक्सिन्स की स्क्रीनिंग की गई और जो नतीजे सामने आए, वे बेहद डरावने थे। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कई मशहूर ब्रांड्स के प्रोटीन पाउडर में आर्सेनिक, लेड (सीसा), कैडमियम और मर्करी (पारा) जैसी भारी धातुओं की मात्रा खतरनाक स्तर पर मौजूद थी।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स ने भी इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए जिम जाने वाले लोगों और प्रोटीन सप्लीमेंट का सेवन करने वालों को तत्काल चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मांसपेशियों के निर्माण और फिटनेस के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शरीर के वजन के हिसाब से प्रतिदिन 1.2 से 2 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन की आवश्यकता होती है। ज्यादातर लोग इस प्रोटीन की मात्रा को आसानी से पूरा करने के लिए प्रोटीन शेक और पाउडर का सहारा लेते हैं। लेकिन अब यही शेक उनके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गए हैं। भारी धातुएं शरीर से आसानी से बाहर नहीं निकलतीं और समय के साथ किडनी, लीवर, ब्रेन तथा इम्यून सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं। लंबे समय तक इनके सेवन से क्रॉनिक फटिक (लगातार थकान), डाइजेस्टिव प्रॉब्लम्स (पाचन संबंधी समस्याएं), हार्मोन असंतुलन और गंभीर मामलों में कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ सकता है। भारत में भी इन विदेशी ब्रांड्स की भारी मांग है। जिम ट्रेनर्स और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स रोजाना इनकी सिफारिश करते हैं, और लाखों युवा बिना किसी जानकारी के इनका इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब भारत में भी स्वास्थ्य मंत्रालय और एफएसएसएआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने और निगरानी रखने की सख्त आवश्यकता है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषित मिट्टी, खराब प्रोसेसिंग तकनीक, कंटैमिनेटेड इंग्रीडिएंट्स और सस्ते मटेरियल का इस्तेमाल करने की वजह से ये टॉक्सिन्स प्रोटीन पाउडर में घुल रहे हैं। कई ब्रांड्स प्लांट बेस्ड प्रोटीन (जैसे मटर प्रोटीन, चावल प्रोटीन) का इस्तेमाल करते हैं, जो प्राकृतिक होने के बावजूद आसानी से भारी धातुओं को अवशोषित कर लेते हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि हमेशा सर्टिफाइड और थर्ड पार्टी टेस्टेड प्रोटीन पाउडर ही खरीदें। ऐसे प्रोडक्ट्स के लेबल पर हेवी मेटल्स टेस्टेड लिखा होना चाहिए।


