जयपुर । राजस्थान के शुष्क और मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में ‘खजूर दिवस’ का विशेष आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मरुधरा के कोने-कोने से आए बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और खजूर की उन्नत खेती, आधुनिक तकनीकों तथा आय बढ़ाने के नए अवसरों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। किसानों को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जलवायु और लगातार सीमित होते जल संसाधनों के इस चुनौतीपूर्ण दौर में खजूर जैसी बागवानी आधारित नकदी फसलें किसानों के लिए एक मजबूत और टिकाऊ आर्थिक विकल्प बन सकती हैं।
इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को खजूर की उन्नत किस्मों, कृत्रिम परागण (आर्टिफिशियल पॉलिनेशन), बेहतर फसल प्रबंधन, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों से व्यावहारिक रूप से अवगत कराया। इस पूरे कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ाकर आधुनिक वैज्ञानिक और बाजार आधारित कृषि से जोड़ना रहा, ताकि वे रेगिस्तानी इलाकों में भी कम पानी के इस्तेमाल से अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर आत्मनिर्भर बन सकें।
विशेषज्ञों ने बताया कि राजस्थान की शुष्क जलवायु के लिए खजूर की कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जिनमें बरही, खलास, मेदजूल, खनेजी और एडीपी-1 प्रमुख रूप से किसानों की पहली पसंद बनी हुई हैं। इनमें ‘मेदजूल’ को खजूरों का राजा कहा जाता है, क्योंकि इसके फल आकार में काफी बड़े व गूदेदार होते हैं और बाजार में इनकी बहुत ऊंची कीमत मिलती है। वहीं ‘बरही’ किस्म अपने अनोखे मीठे स्वाद और जल्दी उत्पादन के लिए जानी जाती है। इसके अलावा एडीपी-1 किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मानसून की दस्तक से पहले ही पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, जिससे पके हुए फलों को बारिश के पानी से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खजूर केवल कच्चे फल के रूप में बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई मूल्य संवर्धित उत्पादों (वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स) के जरिए किसान अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा सकते हैं। खजूर से जैम, सिरप, जूस, स्वादिष्ट चॉकलेट, एनर्जी बार और उत्तम गुणवत्ता वाले ड्राई डेट्स (छुआरे) जैसे खाद्य उत्पाद आसानी से तैयार किए जा सकते हैं, जिनकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हर समय भारी मांग रहती है। वैज्ञानिकों ने किसानों को दूरदर्शी बनने की सलाह देते हुए कहा कि वे केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि इसके प्रसंस्करण, सुरक्षित भंडारण और आकर्षक पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दें। इससे उत्पादों का बाजार मूल्य बढ़ेगा और किसान बिचौलियों से बचकर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचकर अधिकतम लाभ अर्जित कर सकेंगे।


