जीबी के बैठक के एमजी ग्रामीण महाविद्यालय के प्रभार मुक्त करने का आदेश अध्यक्ष सह सांसद नलिन सोरेन का एकतरफा : प्रभारी प्राचार्य उदय प्रसाद सिंह
कहा – उनकी नियुक्ति के पूर्व कालेज में किए गए कई बड़े घोटाले, सचिव से कारवाई की मांग करने के बावजूद नहीं की गई कोई कार्रवाई
पूर्व प्राचार्य अब्दुल रईस खान पर लगाया एमजी कालेज की सारी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का आरोप
रानीश्वर ( दुमका ) मयूराक्षी ग्रामीण महाविद्यालय में प्रभारी प्रचार्य उदय प्रसाद सिंह को शासी निकाय के अध्यक्ष सह सांसद नलिन सोरेन ने पद भार मुक्त कर बिभास चंद्र झा को प्रभारी प्राचार्य मनोनीत किया है । उस आदेशनुसार शासी निकाय के सचिव डा असीम कुमार लायेक ने पत्र निर्गत कर श्री झा को प्रभार लेने का पत्र निर्गत किया है । वह शुक्रवार यहां प्रभार लेने कालेज पहुंचे थे ।प्राचार्य श्री सिंह प्रभार देने से इनकार कर दिया है। बताया है की बिना जीबी के बैठक के उन्हें प्रभार मुक्त करने का आदेश अध्यक्ष श्री सोरेन का एकतरफा आदेश है ।जिस आरोप के आधार पर उन्हें पद भार मुक्त करने का आदेश निर्गत किया है उस विषय को लेकर उनका पक्ष नहीं लिया है ।एक दिन की शॉर्ट नोटिस पर राष्ट्रीय छुट्टी के दिन जीबी की बैठक बुलाया था ।उस बैठक का कोरम पूरा नहीं होने का कारण बैठक स्थगित हो गया था ।तत्पश्चात श्री सोरेन ने बिना उनके पक्ष जाने प्रभार मुक्त करने का आदेश दिया है। जिसको लेकर शुक्रवार श्री सिंह ने प्रेसकॉन्फ्रेंस कर किय बड़े बड़े घोटाले का खुलासा, उन्होंने साफ साफ शब्दों में कहा है की उनको पदभार मुक्त करने झूठ का सहारा ले जा रहा है, उन्होंने खुलासा कर बताया कि उनके प्रभार लेने के पूर्व इस महाविद्यालय में जमीन घोटाले, शिक्षक नियुक्त घोटाले, महाविद्यालय का भवन निर्माण घोटाले, और भी बहुत सी घोटाले हुआ है। जिनके जानकारी मिलने पर उन्होंने हर वार महाविद्यालय के सचिव डा लायेक से जब जब करवाई करने की मांग की तब तब सचिव ने उन्हें मना कर दिया है। आखिर सचिव को कौन सी डर है या किसके इशारे पर चल रहे है। इस महाविद्यालय में दुकानदारी की कारोबार चलाने नहीं देंगे। प्रभारी प्रचार्य उदय प्रसाद सिंह ने कहा है कि उनका नियुक्ति के समय योग्यता से लेकर एक एक चिज की जांच की गई थी। सभी की सहमति से प्रभारी प्रचार्य नियुक्त किया गया था। जबकि सांसद के द्वारा मनोनीत शिक्षक बिभास चंद्र झा को प्रभारी प्रचार्य की जिम्मेवारी दिया गया है। जिनके पास ना ही योग्यता है ओर नहीं एक्सपीरियंस है जबकि और भी कोई पीएचडी वाले वरिष्ठ शिक्षक हैं। श्री झा की नियुक्ति में भी एक प्रश्न उठ रहा है। श्री सिंह ने बताया कि महाविद्यालय के पूर्व प्रचार्य श्री आब्दुल रहिस खान ने महाविद्यालय के सारी जमीन की रजिस्ट्री आपने नाम पर कर लिया है जबकि नियमनुसार महाविद्यालय के सभी जमीन की रजिस्ट्री महामहिम राज्यपाल के नाम पर ही होना होना चहिये था। उदय प्रसाद सिंह ने कहा की शासी निकाय के अध्यक्ष सह सांसद श्री सोरेन को शायद यह सब बात कि जानकारी नहीं मिला है। उनको मेरी खिलाफ भड़काया गया है। मैं अगर गलत हुं तो एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का चयन कर इन सभी बिन्दुओं पर जांच किया जाए दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा ।


