देवघर संताल एक्सप्रेस:-एम्स देवघर के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज (NAMS) के सहयोग से “आदिवासी जनसंख्या में साँप और बिच्छू काटने के प्रबंधन और वर्तमान प्रवृत्तियों” पर एक निरंतर चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।कार्यक्रम का उद्घाटन प्रोफेसर (डॉ.) सौरभ वर्श्नेय,कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ,एम्स देवघर द्वारा स्वागत भाषण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उन्होंने NAMS की गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया और इस कार्यक्रम की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रोफेसर (डॉ.) हरमिंदर सिंह, डीन एकेडमिक्स, और प्रोफेसर (डॉ.) सत्य रंजन पात्र, मेडिकल सुपरिन्टेंडेंट भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा किए, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में साँप और बिच्छू काटने की घटनाओं के संदर्भ में।
इसके बाद, प्रोफेसर (डॉ.) निशात अहमद शेख, प्रोफेसर एवं प्रमुख, फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी विभाग, ने साँप के काटने का परिचय और वर्तमान अवधारणाएँ विषय पर एक जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया। इसके साथ ही, प्रोफेसर (डॉ.) सुदीप्त रंजन सिंह, एम्स भुवनेश्वर से ऑनलाइन माध्यम से साँप के दंश की पहचान पर व्याख्यान प्रस्तुत किया, जो साँप के काटने की पहचान और उससे जुड़ी चिकित्सा प्रक्रियाओं पर आधारित था।डॉ. राजेश कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर,जनरल मेडिसिन विभाग, ने साँप, बिच्छू और कीट के काटने के आपातकालीन प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी, जिसमें इन आपात स्थितियों को संभालने के लिए आवश्यक रणनीतियाँ प्रस्तुत की गईं।कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पद्मश्री डॉ. एच. एस. बावस्कर का व्याख्यान रहा, जिन्होंने साँप के काटने के प्रबंधन और दुनिया भर में बिच्छू के काटने के प्रबंधन में उनके योगदान पर चर्चा की। इसके बाद,डॉ. मनुज कुमार सरकार,एसोसिएट प्रोफेसर, जनरल मेडिसिन,ने बिच्छू और अन्य कीट काटने के महामारी विज्ञान पर अपने विचार रखे,जिसमें उन्होंने इन घटनाओं के प्रसार और पैटर्न पर प्रकाश डाला।इसके बाद,प्रोफेसर (डॉ.) संजीव लालवानी,प्रोफेसर,फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी,एम्स नई दिल्ली,ने साँप,बिच्छू और कीट के काटने के कानूनी पहलुओं पर व्याख्यान दिया,जो चिकित्सा सेवाप्रदाताओं के लिए इस विषय से जुड़ी कानूनी चुनौतियों को उजागर करता है।सत्रों का समापन डॉ. राजेश कुमार द्वारा संचालित एक पैनल चर्चा के साथ हुआ, जिसमें सभी वक्ताओं ने श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए,जिससे कार्यक्रम अत्यधिक संवादात्मक और ज्ञानवर्धक बना।इस सीएमई में एम्स के फैकल्टी, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट्स, इंटर्न्स,एमबीबीएस छात्रों और बी.एससी नर्सिंग छात्रों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसके अलावा, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद,और फुलो झानो मेडिकल कॉलेज, दुमका, से 100 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिससे कुल पंजीकरण 400 से अधिक हो गया।यह सीएमई साँप और बिच्छू काटने के प्रबंधन में नवीनतम जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में कई चर्चाएँ और प्रश्नोत्तर सत्र हुए, जिसमें छात्रों और फैकल्टी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रकार के सीएमई ने चिकित्सा प्रौद्योगिकी में नवीनतम ज्ञान के प्रसार और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कार्यक्रम का समापन डॉ. अभयकुमार धीरज, सहायक प्रोफेसर, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग, एम्स देवघर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


