गुरुजी के सपनों का झारखंड, शिक्षा और संघर्ष से अधिकार छीनेगी राज्य की जनता: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
झारखंड का खनिज, देश का बजट: सोरेन बोले- योगदान हमारा सबसे ज़्यादा, फिर भी हम ‘बेनाम’ क्यों
झारखंड का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया नया मंत्र: शिक्षा से सशक्त और संघर्ष से समृद्ध होगा हर नागरिक
एस.के. झा. ‘सुमन’
दुमका। दुमका के ऐतिहासिक मंच से 47वें झारखंड दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनता को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी संदेश दिया। उन्होंने संथाली और हिंदी में संवाद करते हुए स्पष्ट किया कि गुरुजी शिबू सोरेन का एकमात्र सपना राज्य के बच्चों को उच्च शिक्षित देखना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हमारे पास वह शक्ति है कि हमारे बच्चे इंजीनियर, डॉक्टर और आई.ए.एस बनकर राज्य की सेवा करें।
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विरासत पर गर्व और अंग्रेजों से की तुलना
मुख्यमंत्री ने पूर्वजों के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि जिस व्यवस्था में कभी आदिवासियों को प्रताड़ित किया जाता था, आज उसी व्यवस्था में हमारे बच्चे ‘अंग्रेजों के बच्चों’ विदेशी परिवेश के साथ बराबरी में बैठकर शिक्षा ले रहे हैं। उन्होंने स्वयं को वीर सपूतों की संतान बताते हुए कहा कि वे अपने पूर्वजों के विचारों को कंधे पर उठाकर आगे बढ़ रहे हैं।
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केंद्र पर अनदेखी का आरोप और स्वाभिमान की बात
झारखंड के खनिज संसाधनों की चर्चा करते हुए हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के बजट में झारखंड के खनिजों का योगदान सबसे अधिक है, लेकिन बजट घोषणाओं में राज्य का नाम तक नहीं लिया जाता। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि झारखंड के लोग अब ‘बोका’ (मूर्ख) नहीं हैं; वे राजनीतिक चक्रव्यूह और धनबल के खेल को अच्छी तरह समझते हैं।
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अधिकारों के लिए फिर होगा संघर्ष
नगर पालिका के हो रहे चुनाव को लेकर लगे आचार संहिता का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री ने संक्षिप्त लेकिन कड़े शब्दों में कहा कि झारखंड की जनता ने पहले भी लड़कर अपना हक लिया था और आगे भी अन्याय के खिलाफ मजबूती से लड़ेगी। आर्थिक और मानसिक रूप से कमजोर समझने वालों को आगाह करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंडी जनता विरोधियों की चाल चलने से पहले ही उसे भांप लेती है।
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बसंत सोरेन का आह्वान: संघर्ष से मिला है राज्य, अब संवारने की जिम्मेदारी हमारी
दुमका: झारखंड मुक्ति मोर्चा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर दुमका के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए विधायक बसंत सोरेन ने जनता के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने राज्य की स्थापना और इसके भविष्य को लेकर समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि यह राज्य हमें बहुत मुश्किलों और लंबे संघर्ष के बाद मिला है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह हमारी अपनी सरकार है, और अब यह सोचना हम सभी का उत्तरदायित्व है कि इस राज्य को आगे कैसे ले जाया जाए। उन्होंने इस दिवस को केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विचार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बताया, जहाँ समाज के भविष्य की नींव रखी जा सके। यह दिवस हर साल हमें याद दिलाता है कि हमें समाज के उत्थान के लिए निरंतर विचार करना है। बसंत सोरेन ने कहा कि यह सरकार जनता की अपनी सरकार है, जो समाज के हर वर्ग के लिए समर्पित है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक कदम है।
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दिशोम गुरु की विरासत और हेमंत सोरेन का नेतृत्व: ऐतिहासिक जनसैलाब ने दी श्रद्धांजली: हेमलाल मुर्मू
दुमका। झारखंड के दुमका में आयोजित 47वें झारखंड दिवस समारोह के दौरान उमड़े जनसैलाब ने एक बार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा की अटूट ताकत को साबित कर दिया है। इस अवसर पर हेमलाल मुर्मू, डॉ. लुईस मरांडी और प्रोफेसर स्टीफन मरांडी, राजमहल के सांसद विजय हांसदा, मंत्री सहित अन्य नेताओं ने संयुक्त रूप से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं और श्रद्धा व्यक्त की। नेताओं ने भावुक होते हुए कहा कि आज उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक भीड़ नहीं, बल्कि दिशोम गुरु के प्रति लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है। उन्होंने उल्लेख किया कि यद्यपि “गुरुजी” शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी आत्मा आज भी झारखंड के कण-कण में जीवित है और राज्य के विकास को देख रही होगी। शिबू सोरेन के लंबे संघर्षों से खड़ी की गई पार्टी आज जिस मुकाम पर है, उसे इस ऐतिहासिक भीड़ ने एक बार फिर वीर साबित कर दिया है।
पूरे देश के बड़े आदिवासी नेता के रूप में उदय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व की जमकर सराहना की गई। नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद को केवल झारखंड तक सीमित न रखकर, पूरे हिंदुस्तान के एक सशक्त आदिवासी नेता के रूप में स्थापित कर दिया है। हाल ही में असम में आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनकी बुलंद आवाज ने यह साबित कर दिया है कि वे देशभर के वंचितों की प्रेरणा बन चुके हैं। सांसद विजय हांसदा ने कहा कि एस ए आर में कोई झारखंडी नहीं छुट्टे इसे लेकर आप सजग रहे।
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दुमका रैली में नहीं पहुंची कल्पना सोरेन, जोबा मांझी और महुआ माजी
दुमका। झामुमो द्वारा आयोजित 47 वें झारखंड दिवस समारोह को मुख्य रूप से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबोधित किया।मुख्यमंत्री के अलावा पार्टी के दो सांसदों नलिन सोरेन और विजय हांसदा के साथ ही बसंत सोरेन,मथुरा महतो और डॉ. लुईस मरांडी सहित कई विधायकों ने रैली को संबोधित किया।झामुमो की प्रमुख नेताओं में गांडेय से पार्टी की विधायक कल्पना सोरेन, चाईबासा की एमपी जोबा मांझी और राज्य सभा सांसद महुआ मांजि पार्टी की दुमका रैली में शामिल नहीं हो सकीं,जबकि झामुमो 2 फरवरी के समारोह को उत्सव की तरह मनाता है।दुमका की इस रैली में जोबा मांझी और महुआ मांजि की अनुपस्थिति की वजह संसद के चल रहे सत्र में उनकी व्यस्तता हो सकती है।हालांकि झामुमो की इन प्रमुख नेताओं की दुमका रैली में अनुपस्थिति पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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गुरुजी देह से दूर पर दिल के करीब : प्रोफेसर स्टीफन मरांडी
दुमका: उपराजधानी दुमका आज झामुमो के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर “दुल्हन की तरह” सजी नजर आई। इस पर प्रोफेशनल स्टीफन मरांडी ने काफी खुशी जाहिर की। स्थानीय विधायक बसंत सोरेन के नेतृत्व को सराहा। उमड़े जनसैलाब को नमन करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जनता के अटूट प्रयास और तपस्या का परिणाम है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि गुरुजी भले ही आज मंच पर नहीं हैं, पर उनकी प्रेरणा और संघर्ष का प्रमाण हर झारखंडी के चेहरे पर दिख रहा है। यह राज्य और यह सत्ता बहुत कठिन तपस्या और कुर्बानियों के बाद मिली है। जनता को अधिकार के लिए जागरूक करना चाहिए। आपको यह जानकर करना होगा की यह राज्य आपका है।
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हक मिला और अब विश्वास बढ़ा है, परिवार की तरह एकजुट है झामुमो : विधायक आलोक सोरेन
दुमका: झारखंड मुक्ति मोर्चा के 47वें स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर शिकारीपाड़ा के नवनिर्वाचित विधायक आलोक सोरेन ने राज्यवासियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज हमें अपने हक मिले हैं और यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व का ही परिणाम है कि आज जनता का विश्वास सरकार पर और मजबूत हुआ है। आलोक सोरेन ने जोर देकर कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक “परिवार” की तरह है। उन्होंने आह्वान किया कि जैसे हम अपने परिवार के सुख-दुख साझा करते हैं, वैसे ही झामुमो कार्यकर्ता भी एक साथ मिलकर राज्य के विकास में योगदान दें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झामुमो हर बाहरी और भीतरी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे “आपनार आतो कामी” के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक हक पहुँचाया जा रहा है। यह आयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यह झामुमो के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है। आलोक सोरेन ने अपने पिता नलिन सोरेन की विरासत और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के आदर्शों को आगे ले जाने का संकल्प दोहराया।
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