नई दिल्ली । आजकल सोशल मीडिया पर नमक की अनोखी सफेद खेती के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। दर्शक इन वीडियो को देखकर आश्चर्यचकित हैं कि कैसे समुद्र के खारे पानी को बड़े-बड़े मैदानों में फैलाकर सुखाया जाता है और फिर चमकती हुई सफेद नमक की फसल तैयार हो जाती है। यह सदियों पुरानी एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो आज भी लाखों लोगों की रोजी-रोटी का साधन है। भारत दुनिया के सबसे बड़े नमक उत्पादकों में से एक है, और यहाँ की नमक की खेती एक महत्वपूर्ण उद्योग है। भारत में गुजरात का कच्छ का रण, राजस्थान का सांभर झील इलाका और तमिलनाडु के समुद्री किनारे नमक की खेती के प्रमुख केंद्र हैं। इन स्थानों पर बड़े-बड़े मैदान बनाए जाते हैं जिन्हें ‘सॉल्ट पैन’ या नमक के खेत कहते हैं। ये खेत समुद्र से थोड़ा ऊंचे या नीचे स्तर पर होते हैं ताकि पानी आसानी से आ और जा सके। स्थानीय मछुआरे या किसान समुद्र के खारे पानी को इन मैदानों में भरते हैं, और फिर शुरू होती है तेज धूप और शुष्क हवा की मेहनत। नमक तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। सबसे पहले, पानी को कई छोटे-छोटे टैंकों या पैन में भर दिया जाता है।
तेज धूप में पानी धीरे-धीरे भाप बनकर उड़ने लगता है। जैसे-जैसे पानी कम होता जाता है, उसकी खारापन बढ़ता जाता है। आखिरकार, पानी में घुले हुए नमक के क्रिस्टल बनने लगते हैं। ये क्रिस्टल पहले छोटे-छोटे सफेद दानों के रूप में दिखाई देते हैं, और जब पूरी परत बन जाती है तो खेत सफेद चादर की तरह चमकने लगता है। दूर से देखने पर ऐसा लगता है मानो पूरा मैदान बर्फ से ढका हो, लेकिन असल में यह शुद्ध नमक होता है। नमक तैयार होने के बाद, किसान हाथों से या छोटे औजारों से नमक को खुरच-खुरचकर इकट्ठा करते हैं। फिर इसे धोकर साफ किया जाता है ताकि इसमें मौजूद गंदगी निकल जाए। कुछ जगहों पर आधुनिक मशीनों का भी इस्तेमाल होता है, लेकिन ज्यादातर काम अभी भी हाथ से ही होता है। एक हेक्टेयर खेत से कई टन नमक का उत्पादन हो सकता है, और पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर तीन से चार हफ्ते लगते हैं। मानसून के मौसम में नमक की खेती बंद कर दी जाती है क्योंकि बारिश नमक को गलाकर बर्बाद कर देती है।
नमक की खेती सिर्फ खाने के नमक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग औद्योगिक नमक, पशुओं के चारे में, साबुन, कांच और कई रसायनों के निर्माण में भी होता है। भारत में हर साल लाखों टन नमक पैदा होता है, जिसमें गुजरात अकेला देश का 70 प्रतिशत से ज्यादा नमक उत्पादन करता है। कच्छ के रण में नमक की खेती का नजारा देखने लायक होता है। दूर-दूर तक फैले सफेद मैदान, बीच में नीले पानी के छोटे-छोटे तालाब और आसमान में चमकती धूप यह दृश्य पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। लेकिन यह खेती आसान नहीं है। गर्मी में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच जाता है, और किसान घुटनों तक खारे पानी में खड़े होकर काम करते हैं। उनकी त्वचा जल जाती है और पैरों में घाव हो जाते हैं, फिर भी वे मुस्कुराते हुए काम करते रहते हैं।


