नई दिल्ली । दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव देश की छात्र राजनीति का आईना माने जाते हैं। यहां से निकले कई छात्र नेता आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में अहम पदों पर पहुंचे हैं। इस बार डूसू चुनाव प्रचार में पैसों और संसाधनों का दिखावा किया गया। बेंटले, फरारी, रोल्स रॉयस जैसी लग्जरी कारों से प्रचार किया गया। कई जगहों पर चुनावी शक्ति प्रदर्शन के लिए जेसीबी और भारी मशीनरी भी तैनात की गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है।
कोर्ट ने नवनिर्वाचित डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और अन्य विजेताओं को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर इतनी महंगी गाड़ियां और संसाधन चुनाव प्रचार में कैसे इस्तेमाल हुए। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- छात्र राजनीति मुद्दों और विचारों के आदान-प्रदान का मंच होना चाहिए था। अब केवल दिखावे और पैसों की ताकत का प्रदर्शन बनकर रह गई है। अदालत ने साफ कहा कि छात्रों ने पिछले साल के आदेश से कोई सबक नहीं लिया। उस समय उपद्रव और हिंसा की वजह से चुनाव परिणाम रोकने पड़े थे।
बीते रोज सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हुए दिखावे पर सख्त रुख अपनाया। छात्र संघ चुनाव का मकसद शिक्षा, रोजगार, फीस, हॉस्टल सुविधाओं और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर विमर्श होना चाहिए। लेकिन अब यह मंच महंगी गाड़ियों, डीजे और रैलियों का अखाड़ा बन गया है। अदालत ने टिप्पणी की- ‘हमने तो इन कारों के नाम तक नहीं सुने। ऐसे में यह कल्पना से परे है कि छात्र उन्हें प्रचार में कैसे इस्तेमाल कर पा रहे हैं। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि इन चुनावों में बाहरी ताकतें और बड़े पैमाने पर पैसा झोंका जा रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट का मानना है कि अगर समय रहते इस तरह के दिखावे पर रोक नहीं लगी तो आने वाले सालों में डूसू चुनाव सिर्फ संसाधन संपन्न उम्मीदवारों तक सीमित होकर रह जाएंगे और वास्तविक छात्र मुद्दे हाशिये पर चले जाएंगे। अदालत ने सुनवाई के दौरान पिछले साल की घटनाओं का भी जिक्र किया। 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान जमकर उपद्रव हुआ था, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और हिंसक झड़पें हुई थीं। उस समय अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा था और चुनाव परिणाम तक रोक दिए गए थे।


