नई दिल्ली । कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना का ऑपरेशन सफेद सागर आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे सफल अभियानों में गिना जाता है। मई 1999 में शुरू हुए इस अभियान ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बैठे पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, दुश्मन की स्टिंगर मिसाइलों और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार न करने की सख्त शर्तों के बावजूद भारतीय वायुसेना ने रणनीति, तकनीक और साहस के दम पर अभियान को सफल बनाया।
कारगिल क्षेत्र में युद्ध समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर लड़ा जा रहा था, जहां मौसम और भूगोल दोनों ही बड़ी चुनौती थे। एलओसी स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं थी, लेकिन भारतीय वायुसेना को किसी भी परिस्थिति में सीमा पार नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। इसी दौरान पाकिस्तान की ओर से लगातार सतह से हवा में मार करने वाली स्टिंगर मिसाइलें दागी जा रही थीं। भारतीय बमवर्षक विमान कैनबरा भी इन हमलों की चपेट में आ चुका था, जबकि हेलीकॉप्टरों का संचालन भी बेहद जोखिमपूर्ण हो गया था। इन परिस्थितियों में वायुसेना ने अपनी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया और मिराज-2000 लड़ाकू विमानों को अभियान में उतारा। इन विमानों को अत्याधुनिक लेजर-निर्देशित तकनीक और लक्ष्य पहचान प्रणाली से लैस किया गया, जिससे दुश्मन के ठिकानों पर अत्यंत सटीक हमले संभव हो सके। विशेष रूप से मुंथो ढालो स्थित पाकिस्तान के प्रमुख प्रशासनिक और रसद केंद्र पर किए गए हमले ने दुश्मन की आपूर्ति व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचाया और उसकी सैन्य क्षमता कमजोर कर दी। ऑपरेशन की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि इतने व्यापक हवाई अभियान के बावजूद भारतीय सेना पर गलती से हमला यानी ‘फ्रेंडली फायरकी कोई घटना नहीं हुई। वायुसेना ने थलसेना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए नए ऑपरेशनल नियम तैयार किए, जिससे हर मिशन योजनाबद्ध और सुरक्षित तरीके से पूरा किया गया।
भारतीय पायलटों ने कई अभियानों में रात के समय बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन को चौंका दिया। इस अप्रत्याशित रणनीति ने पाकिस्तान को संभलने का मौका नहीं दिया और भारतीय सेना को जमीनी मोर्चों पर भी बढ़त मिली। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सफेद सागर ने यह साबित किया कि सीमित दायरे और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद आधुनिक तकनीक, सटीक योजना और उत्कृष्ट समन्वय के बल पर निर्णायक सफलता हासिल की जा सकती है। ऑपरेशन सफेद सागर 26 मई 1999 को शुरू किया गया था। इसे कारगिल युद्ध के दौरान थलसेना के ऑपरेशन विजय के समर्थन में संचालित किया गया। 25 मई को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिलने के बाद अगले दिन भारतीय वायुसेना ने पहली हवाई कार्रवाई की। वर्ष 1971 के युद्ध के बाद कश्मीर क्षेत्र में वायु शक्ति के इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का यह पहला अवसर था। इस अभियान ने न केवल कारगिल विजय में अहम योगदान दिया, बल्कि भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता और पेशेवर दक्षता का भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
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